सरगुजा जिले के परसोढ़ी कला में ग्रामीणों एवं पुलिस की झड़प की जांच के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जांच कमेटी गठित की है। भूमि अधिग्रहण का विरोध करने वाले ग्रामीणों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। दोनों ओर से हुए पथराव में करीब 39 से पुलिस अधिकारी-क
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सरगुजा के परसोढ़ी कला में बुधवार को अमेरा ओपन कास्ट कोल माइंस के विस्तार के लिए अधिगृहीत जमीन के सीमांकन के लिए प्रशासनिक अमला करीब 500 की संख्या में पुलिस जवानों के साथ पहुंचा था। परसोढ़ी कला के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। इस बीच दोनों ओर से पथराव हुआ। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर ग्रामीणों को भगाया। पथराव में पुलिसकर्मी एवं ग्रामीण दोनों घायल हुए हैं।

पेड़ों को हटाने का काम पूरे दिन चलता रहा
150 से अधिक लोगों के खिलाफ FIR, 55 ग्रामीण नामजद आरोपी हैं, शेष अन्य में हैं। पुलिस ने मामले में गैर जमानती धाराएं लगाई हैं। ग्रामीणों के खिलाफ धारा 126, 192(2),91(3),190,296,223,123,121,109, BNS के तहत FIR दर्ज की गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इनमें से कई ऐसे लोगों को आरोपी बनाया गया है, जो घटना के दौरान गांव में नहीं थे। पुलिस ने एफआईआर की कापी सार्वजनिक नहीं की है। ऑनलाइन FIR को सेंसेटिव कर दिया गया है, जिससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि किन ग्रामीणों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

कांग्रेस ने बनाई जांच टीम
कांग्रेस ने गठित की 10 सदस्यीय जांच टीम कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक सिंह बैज ने परसोढ़ी कला मामले की जांच के लिए 10 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के निर्देश पर जांच टीम गठित करते हुए प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने बताया है कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस ने बर्बर कार्रवाई की है।
कांग्रेस द्वारा गठित जांच कमेटी के संयोजक पूर्व मंत्री प्रेमसाय सिंह बनाए गए हैं। सदस्यों में विधायक इंद्रशाह मंडावी, जनक ध्रुव, पूर्व महापौर डा. अजय तिर्की, कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता सहित मधु सिंह, सीमा सोनी, मुनेश्वर राजवाड़े, अनिता केरकेट्टा शामिल हैं।

पथराव के बीच फंसी टीआई सुनीता भारद्वाज का वीडियो वायरल
फोर्स लगाकर तीसरे दिन भी सीमांकन, मशीनें लगीं बुधवार को हुए पथराव के बाद ग्रामीण पीछे हट गए हैं। गुरुवार को करीब 500 की संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात कर सीमांकन का काम कराया गया। शुक्रवार को भी फोर्स तैनात कर सीमांकन कराया गया। इस दौरान ठेका कंपनी LCC की मशीनें जमीनों से पेड़ों को गिराने एवं मेड़ों को काटने में लगी रहीं।
विरोध के लिए बनाई जा रही रणनीति पुलिस से झड़प व पुलिस कार्रवाई के बाद बेबस हैं, लेकिन विरोध के लिए रणनीति बनाई जा रही है। खदान के लिए 238 ग्रामीणों की जमीनें वर्ष 2001 में अधिगृहीत की गई थीं। इनमें से मात्र 19 ने मुआवजा लिया है। नौकरी भी नहीं दी गई है। बिना मुआवजा व नौकरी दिए ही कंपनी कोल उत्खनन करना चाहती है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
ग्रामीण अपनी जमीन बचाने वर्षों से जूझ रहे थे, फिलहाल उनकी जमीनों पर मशीनें चल रही हैं।
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