विजयादशमी पर मनेंद्रगढ़ में दुर्गा विसर्जन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सिविल लाइन दुर्गा सेवा समिति ने उज्जैन से विशेष झांझ और डमरू टीम को आमंत्रित किया था। महाकाल की नगरी उज्जैन से आई इस टीम ने अपनी कला और संस्कृति का अद्भुत प्रदर्शन किया।
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उनके प्रदर्शन को देखने के लिए शहर के चौक-चौराहों से लेकर हसदेव गंगा तट तक भारी भीड़ उमड़ पड़ी। विसर्जन यात्रा के दौरान झांझ और डमरू की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। इसी क्रम में मनेंद्रगढ़ के शीतला माता की मढ़िया प्रांगण में महाआरती का भी आयोजन किया गया।

सिविल लाइन दुर्गा सेवा समिति के सदस्यों ने बताया कि डीजे और धमाल जैसे साउंड सिस्टम से ध्वनि प्रदूषण होता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे साउंड सिस्टम के उपयोग पर सख्त निर्देश दिए हैं। समिति के अनुसार, झांझ और डमरू की ध्वनि से वातावरण शुद्ध रहता है और यह हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसलिए समिति ने इस बार माता के विसर्जन में अपनी संस्कृति को प्राथमिकता देते हुए पारंपरिक तरीके से विदाई करने का निर्णय लिया।

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