परीक्षा दी, फिर भी रिजल्ट में एब्सेंट कर फेल किया: धोखे से दोबारा परीक्षा दिलवाई, न्याय मांगने कलेक्ट्रेट पहुंची छात्रा

राजनांदगांव। शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला उपरवाह, घुमका ब्लॉक में 10वीं बोर्ड परीक्षा से जुड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि परीक्षा में उपस्थित रहने के बावजूद एक छात्रा को परिणाम में अनुपस्थित दर्ज कर अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया। इसके बाद छात्रा और उसके परिजनों को दोबारा पूरक परीक्षा दिलाई गई। अब छात्रा के पिता ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मामले की शिकायत की है। मामला वर्ष 2023 की 10वीं बोर्ड परीक्षा से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता मिथिलेश साहू के मुताबिक, उनकी पुत्री भारती साहू ने बोर्ड परीक्षा के सभी विषयों में परीक्षा दी थी। इसमें अंग्रेजी विषय की परियोजना (प्रोजेक्ट) परीक्षा भी शामिल थी। इसके बावजूद विद्यालय के परीक्षा प्रभारी वशिष्ठ सिंह, प्राचार्य निखिला वर्मा और शिक्षकों की ओर से माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर को छात्रा की उपस्थिति के संबंध में गलत जानकारी भेजे जाने का आरोप है। परिणाम जारी होने पर छात्रा को अनुपस्थित बताते हुए अनुत्तीर्ण कर दिया गया। इससे छात्रा और उसके परिवार को मानसिक परेशानी से गुजरना पड़ा।
परिजनों के अनुसार, छात्रा ने सभी विषयों की परीक्षा दी थी। अंग्रेजी विषय की परियोजना परीक्षा में भी वह उपस्थित रही थी। इसके बावजूद परीक्षा परिणाम में उसे अनुपस्थित दर्शाया गया और वह अनुत्तीर्ण हो गई। परिजनों का आरोप है कि विद्यालय के परीक्षा प्रभारी और संबंधित शिक्षकों की लापरवाही के कारण छात्रा की उपस्थिति की गलत जानकारी माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर को भेजी गई।
परिणाम सामने आने के बाद जब छात्रा की उपस्थिति को लेकर सवाल उठे तो परिजनों ने स्कूल में जानकारी ली। शिकायत के अनुसार, परीक्षा प्रभारी ने गलती सुधारने के बजाय छात्रा और उसके परिजनों को यह बताया कि पूरक परीक्षा का फॉर्म भरने के बाद अंकसूची में सुधार हो जाएगा। इसके बाद छात्रा को दोबारा पूरक परीक्षा दिलाई गई। पूरक परीक्षा का परिणाम आया तो छात्रा को उत्तीर्ण घोषित किया गया। अब परिजनों का सवाल है कि जब छात्रा मूल बोर्ड परीक्षा में उपस्थित थी और उसके अनुसार उसने सभी विषयों की परीक्षा दी थी, तो उसे अनुपस्थित बताने की गलती क्यों हुई और गलती सुधारने के बजाय उससे दोबारा परीक्षा क्यों दिलाई गई?
छात्रा भारती साहू ने बताया कि उसके साथ धोखा हुआ है। उसने 10वीं बोर्ड की सभी परीक्षाएं दी थीं और प्रोजेक्ट भी जमा किया था, लेकिन रिजल्ट में इंग्लिश के प्रोजेक्ट में उसे अनुपस्थित (एब्सेंट) दर्शाते हुए सप्लीमेंट्री लिखा गया। इसके बाद उसने विषय शिक्षक से संपर्क किया। शिक्षक ने पहले जांच करने की बात कही। स्कूल पहुंचने पर उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि उनसे गलती हुई है।
भारती ने बताया कि इसके बाद वह गांव के बड़ों के साथ स्कूल गई थी। वहां राजपूत सर ने आश्वासन दिया कि उसके रिजल्ट में सुधार कर दिया जाएगा और उसे केवल एक जगह हस्ताक्षर करने जाना होगा। इसके बाद उसे स्टेट स्कूल ले जाया गया, जहां उसे अकेले बैठाकर सप्लीमेंट्री की परीक्षा दिलाई गई। उसके अनुसार, उसे उसके पुराने प्रोजेक्ट को देखकर नए उत्तर-पत्र में जवाब लिखने के लिए कहा गया।
भारती ने बताया कि बाद में जब उसने सप्लीमेंट्री का रिजल्ट देखा तो उसमें भी सुधार नहीं हुआ था और स्टार लगा हुआ था। उसका आरोप है कि उस पर यह कहकर दबाव बनाया गया कि वह सप्लीमेंट्री आई है, इसलिए उसे परीक्षा देनी होगी। भारती का कहना है कि उसे यह कहकर गुमराह किया गया कि रिजल्ट में सुधार स्कूल स्तर से ही कर दिया जाएगा। उसने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।
डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल ने कहा कि शिक्षा मंडल की व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। एक गलती के कारण बच्ची का भविष्य प्रभावित हो रहा है। भारती हमेशा अच्छे अंक लाने वाली छात्रा रही है, लेकिन उसे दबाव में आकर दोबारा परीक्षा देनी पड़ी। इस पूरे मामले के कारण वह मानसिक रूप से काफी परेशान है। विधायक ने कहा कि यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां बच्चों की गलती नहीं होने के बावजूद उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है।
उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से बात की है। अधिकारी ने जांच चलने की बात कही है, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी भारती को न्याय के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। विधायक ने कहा कि भारती को न्याय मिलना चाहिए। साथ ही छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल में हुई कथित गड़बड़ियों की पुख्ता जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
मामले को लेकर छात्रा के परिजन स्थानीय डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। परिजनों ने मांग की है कि 10वीं बोर्ड परीक्षा में छात्रा की वास्तविक उपस्थिति और परीक्षा से संबंधित सभी अभिलेखों की जांच कराई जाए। यदि अभिलेखों से छात्रा की मूल परीक्षा में उपस्थिति साबित होती है तो जिम्मेदार शिक्षकों और परीक्षा प्रभारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही परिजनों ने छात्रा को उसकी प्रथम/मूल परीक्षा के वास्तविक अंकों के आधार पर सुधारयुक्त परिणाम और अंकसूची जारी करने की मांग की है।
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल ने बताया कि संबंधित व्याख्याता तथा परीक्षा प्रभारी पर कार्रवाई के लिए प्रतिवेदन लिखा गया है। उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा मंडल को मुख्य परीक्षा में अंक जोड़कर संशोधित अंकसूची और प्रमाण पत्र प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब मामले में जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई और छात्रा के संशोधित परिणाम की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। मामला वर्ष 2023 की परीक्षा से जुड़ा होने के कारण संबंधित परीक्षा अभिलेखों के आधार पर पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।



