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शहर की समाज सेवी मातृ शक्तियों ने नवरात्रि नवमी के दिन शहर के समस्त गरबा पंडालों एवं दुर्गा पंडालों में जाकर सौजन्य भेंट देते हुए शहर में धार्मिक भाईचारा ,सामाजिक सद्भाव व राष्ट्रीय एकता की मिसाल पेश की है। शहर की वरिष्ठ समाजसेवी शारदा तिवारी के नेतृत्व में भाजपा, कांग्रेस व सनातन धर्म सभा एवं गौड़ ब्राह्मण समाज सहित अन्य समाज की महिलाएं एकत्रित हो कर शहर के विभिन्न स्थानों पर चल रहे गरबा पंडालों में भेंट दी और मातारानी की पूजा- अर्चना कर शारदीय नवरात्रि पर्व की सबकी सुख-समृद्धि व खुशहाली दुआएं मांगी।
शहर की इन समाज सेवी महिलाओं ने लायन्स क्लब राजनांदगांव सिटी द्वारा आयोजित गायत्री विद्यापीठ मैदान में गरबा उत्सव – 2025 व शिवनाथ वाटिका मठपारा रोड में आयोजित गरबा उत्सव , श्री लोहाणा महाजन बाड़ी गरबा उत्सव सहित कैलाश नगर स्थित श्री जलाराम बाबा गरबा उत्सव एवं कालीबाड़ी गरबा उत्सव आयोजन में पहुंच कर आयोजकों को सौजन्य भेंट दी और मां दुर्गा अंबे की पूजा आराधना कर मातारानी की शान में गरबा खेला। इस दौरान गरबा उत्सव के आयोजकों द्वारा इन समाजसेवी मातृ शक्तियों का भाव- भीना सम्मान किया गया और उनके गरबा स्थलों में पहुंचने पर प्रसन्नता व्यक्त की गई।
ये महिलाएं रही शामिल: गरबा उत्सवों व मां दुर्गा पंडालों में जाकर अपनी उपस्थिति देने वाली और मातारानी की पूजा-अर्चना करने वाली समाज सेवी महिलाओं में शारदा तिवारी,भाजपा की डॉ. रेखा मेश्राम, पूर्णिमा साहू,क्रांति मौर्य , ज्योति माखीजा ,माधुरी जैन, कांग्रेस की नियामत हुड्डा, प्रज्ञा गुप्ता, माया शर्मा, प्रतिमा बंजारे, सहित राजपूत समाज श्रीमती सुषमा सिंह, गुजराती समाज की श्रीमती रेखा लाल, भानू बेन, कस्तुरबा की साधना तिवारी सहित विभिन्न समाज की महिलाएं शामिल थी। उक्ताशय की जानकारी बागेश्वर धाम की प्रज्ञा गुप्ता ने दी।
राजनीतिक मतभेद हैं लेकिन मनभेद नहीं शहर की वरिष्ठ समाजसेवी एवं अधिवक्ता शारदा तिवारी ने कहा कि हमारे संस्कार धानी नगरी में हर धर्म, हर समाज के लोगों को अपने तीज-त्योहार,पर्व, सामाजिक अनुष्ठान मनाने की सुदीर्घ परम्परा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यहां राजनीतिक दलें भी है लेकिन उनमें विचारधाराओं का मतभेद है लेकिन मन भेद नहीं है। तभी तो हम हर त्योहार,हर पर्व और परंपराओं को मिल कर मनाते हैं और संस्कार धानी नगरी में रहने वाले लोग कहते है।संस्कारधानी के लोग हर धर्मों की इज्जत और सम्मान करते हैं। जिसकी मिसाल शहर में जब- तब देखने को मिलती है।
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