Facebook Twitter Youtube
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • न्याय
  • राजनीति
  • साहित्य
  • धर्म-समाज
  • वीडियो
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • न्याय
  • राजनीति
  • साहित्य
  • धर्म-समाज
  • वीडियो
Home » On Christmas know the story of the Chhattisgarhi translation of the Bible | क्रिसमस पर जानिए बाइबिल के छत्तीसगढ़ी अनुवाद की कहानी: विश्रामपुर में जर्मन ने बनवाई थी पहली चर्च; यहीं से प्रदेश में फैली क्रिश्चियनिटी – Chhattisgarh News
Breaking News

On Christmas know the story of the Chhattisgarhi translation of the Bible | क्रिसमस पर जानिए बाइबिल के छत्तीसगढ़ी अनुवाद की कहानी: विश्रामपुर में जर्मन ने बनवाई थी पहली चर्च; यहीं से प्रदेश में फैली क्रिश्चियनिटी – Chhattisgarh News

By adminDecember 25, 2025No Comments9 Mins Read
Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
eod 35 1766592621
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email


जानिए छत्तीसगढ़ में पहला चर्च कब और कहां स्थापित हुआ, और प्रदेश के कोने-कोने में ईसाई धर्म का प्रसार कैसे हुआ।

दुनियाभर में क्रिसमस का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में भी इस अवसर पर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। यहां कई चर्च अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं। मसीही समाज के सबसे बड़े पर्व, प्रभु यीशु मसीह (जीसस क्राइस्ट) के जन्मदिवस के

.

छत्तीसगढ़ में लगभग 727 चर्च हैं। हालांकि, ग्रामीण अंचलों में छोटे-छोटे चर्चों को मिलाकर इनकी संख्या 900 के पार है। इस रिपोर्ट में आप पढ़ेंगे छत्तीसगढ़ के उन चर्चों की अनसुनी कहानियां, जो इतिहास की गवाही देती हैं। साथ ही जानेंगे बाइबिल के एक अध्याय के छत्तीसगढ़ी अनुवाद की रोचक कहानी। साथ ही उस अनोखे द्वीप के बारे में, जहां 2 धार्मिक धाराओं का शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक संगम देखने को मिलता है।

पहले देखिए ये तस्वीरें-

दुनियाभर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी क्रिसमस का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।

दुनियाभर के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी क्रिसमस का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में लगभग 727 चर्च हैं, यहां भी क्रिसमस उत्साह के साथ मनाया जाता है।

छत्तीसगढ़ में लगभग 727 चर्च हैं, यहां भी क्रिसमस उत्साह के साथ मनाया जाता है।

छत्तीसगढ़ का पहला चर्च बलौदाबाजार के विश्रामपुर में बना था।

छत्तीसगढ़ का पहला चर्च बलौदाबाजार के विश्रामपुर में बना था।

छत्तीसगढ़ में ऐसे बना पहला मिशनरी चर्च

प्रदेश के इतिहास में दर्ज पहला मिशनरी चर्च (इम्मानुएल) 18वीं सदी में बलौदाबाजार के विश्रामपुर में बना था। इसे ‘द सिटी ऑफ रेस्ट’ के नाम से जाना जाता है। क्रिश्चियन समुदाय के लिए तो यह किसी तीर्थ से कम नहीं है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में फैले ईसाई धर्म की धारा यहीं से निकली है।

फादर लोर ने छत्तीसगढ़ के पहले चर्च की नींव रखी। 15 फरवरी 1873 को इम्मानुएल चर्च का निर्माण शुरू किया गया। 29 मार्च 1874 को यह बनकर तैयार हो गया। पत्थरों से बने, बिना कॉलम के बने इस चर्च की सबसे बड़ी खासियत है इससे लगा हुआ कब्रिस्तान।

यहां मुख्य प्रार्थना घर और कब्रों के बीच 10-12 फीट का रास्ता बस है। आज भी यहां शव दफनाए जाते हैं। जानकार बताते हैं कि देश में यह संभवतः पहला चर्च है, जिससे लगा हुआ कब्रिस्तान है।

5 फरवरी 1873 को इम्मानुएल चर्च का निर्माण शुरू किया गया था।

5 फरवरी 1873 को इम्मानुएल चर्च का निर्माण शुरू किया गया था।

फादर ऑफ विश्रामपुर ऑस्कर थियोडोर लोर

28 मार्च 1824 में जर्मनी में जन्मे ऑस्कर थियोडोर लोर के पिता सर्जन थे। उन्होंने अपने बेटे को मेडिकल की पढ़ाई के लिए पहले जर्मनी के एक कॉलेज में और फिर रशिया भेज दिया। उन्होंने बर्लिन की गॉसनर मिशनरी सोसाइटी ज्वॉइन की। वे पहली बार 1850 में रांची आए।

1857 तक उन्होंने यहां हिंदी सीखी, लोगों का इलाज किया, उनकी सेवा की। 1858 में वे अमेरिका चले गए। 1868 में फिर भारत लौटे। इस बार वे परिवार सहित यहीं बस जाने के लिए आए थे। उन्होंने विश्रामपुर में अपनी सेंट्रल इंडिया की मिशनरी का हेडक्वार्टर बनाया और यहीं रहने लगे।

उनकी पत्नी और दो बेटे भी उनके साथ यहां से ग्रामीणों के इलाज, उन्हें भोजन, शिक्षा, रोजगार मुहैया कराने में जुट गए। फादर लोर की मौत 1907 में कवर्धा में हुई, लेकिन उनका शरीर बाद में विश्रामपुर लाकर दफनाया गया।

szfprq 1766590377

धर्म के प्रसार के लिए बाइबिल का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद

फादर लोर और उनके दोनों बेटों ने प्रदेश के दूसरे हिस्सों में तेजी से ईसाई धर्म को फैलाना शुरू किया। जूलियस ने तो यहां के लोगों को ईसाई धर्म से जोड़ने के लिए बाइबिल के एक अध्याय गॉस्पेल ऑफ मार्क्स का छत्तीसगढ़ी में अनुवाद कर दिया था।

फादर लोर की मिशनरी ने उस समय कितनी तेजी से छत्तीसगढ़ियों को ईसाई बनाया इसका उदाहरण है कि 1880 में जहां विश्रामपुर में 4 लोगों ने ईसाई धर्म अपनाया था, वहां 1883 आते-आते इनकी संख्या 258 पहुंच गई। 1884 तक विश्रामपुर के अलावा रायपुर, बैतलपुर और परसाभदर में मिशनरी के 3 सेंटर बना दिए गए थे।

इसके साथ ही इन जगहों में 11 स्कूल खोल दिए गए थे। अब तक इन सभी स्थानों पर दूसरे धर्मों से क्रिश्चियन बन चुके लोगों की संख्या 1 हजार 125 हो गई थी। 154 साल पहले विश्रामपुर से शुरू इस मिशनरी की शाखाएं गांव-गांव में हैं और लाखों लोग इससे जुड़े हैं।

ऐसा गांव जहां 100 फीसदी आबादी क्रिश्चियन

विश्रामपुर में प्रवेश के साथ ही आपको दोनों ओर के घरों में क्रॉस या ईसाई समाज के धर्मचिन्ह, स्लोगन लिखे दिखने लगेंगे। जब फादर लोर यहां आए थे तो इस इलाके में सतनामी समाज का वर्चस्व था। उन्होंने यहां के लोगों की मदद करना शुरू किया। वे मेडिकल फील्ड से थे, लिहाजा दवाएं, इलाज, भोजन, शिक्षा और दूसरी सुविधाएं देकर लोगों को प्रभाव में ले लिया।

1870 से उन्होंने धीरे-धीरे लोगों को ईसाई धर्म में शामिल करना शुरू किया। वर्तमान में इस चर्च के सेक्रेटरी दावा करते हैं कि भारत में विश्रामपुर एक ऐसा अनोखा गांव है, जिसकी 100 फीसदी आबादी क्रिश्चियन है। ये उन्हीं लोगों की पीढ़ी है जिन्हें फादर लोर ने क्रिश्चियन बनाया था।

मदकू द्वीप में हरिहर क्षेत्र से कुछ दूरी पर स्थित वह मंच जहां मसीही समाज का मेला लगता है।

मदकू द्वीप में हरिहर क्षेत्र से कुछ दूरी पर स्थित वह मंच जहां मसीही समाज का मेला लगता है।

मदकू द्वीप- जहां हिंदू-ईसाई समुदायों की परंपरा साथ-साथ

छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में शिवनाथ नदी पर स्थित मदकू द्वीप पौराणिक महत्व वाला है। यह द्वीप मांडूक्य ऋषि की तपोस्थली है, यहां के तटवर्ती क्षेत्रों में आदि मानवों के रहने के प्रमाण भी मिले हैं। छत्तीसगढ़ सरकार के संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग ने इस पर संज्ञान लेते हुए 2011 में इस स्थल की खुदाई शुरू की। ईसवी सन के शुरुआती दौर के गुप्तकाल और 11वीं सदी के कल्चुरी काल की मूर्तियां भी मिली है।

मदकू द्वीप वह स्थान भी है, जहां 1909 से हर साल मसीही समाज के द्वारा मेले का आयोजन किया जा रहा है। हर साल यहां मेला फरवरी में आयोजित होता है। जिसमें छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देशभर के ईसाई समुदाय के लोग शामिल होते हैं। जिसमें आत्मिक संदेश के साथ-साथ काव्य पठन, वाद-विवाद, गीत-संगीत आदि का आयोजन होता है। मदकू द्वीप में हिंदू और ईसाई समुदायों की परंपराएं और सांस्कृतिक धाराएं देखने को मिलती है।

मदकू द्वीप में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई में मिले मंदिर और मूर्तियों के अवशेष।

मदकू द्वीप में पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई में मिले मंदिर और मूर्तियों के अवशेष।

चारों तरफ घने जंगल से घिरा मदकू द्वीप

50 एकड़ में फैला मदकू द्वीप चारों तरफ घने जंगल से घिरा है। मदकू द्वीप पर पहुंचने के शिवनाथ नदी को पार करना पड़ता है। इसी घने जंगल के बीच स्थित है हरिहर क्षेत्र में कई मंदिर हैं। इनमें से एक प्राचीन गणेश मंदिर की पुनः प्रतिष्ठा 2021 में ही हुई है। इस मंदिर में भगवान गणेश की अष्टभुजी प्रतिमा है, वह 10-11वीं सदी की बताई जाती है।

जशपुर जिले का ये गिरजाघर एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च है।

जशपुर जिले का ये गिरजाघर एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च है।

कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च

जशपुर जिले का शहर है कुनकुरी। यहां एशिया की दूसरी सबसे बड़ी चर्च है। इस चर्च को इसकी विशालता के लिए महागिरजाघर भी कहा जाता है। खास बात ये भी है कि सालों पहले जब इस चर्च को बनाया गया तब पहाड़ और जंगलों से ये इलाका घिरा हुआ था।

17 साल में बनकर तैयार हुए महागिरजाघर को आदिवासी मजदूरों ने बनाया था। जशपुर जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर की दूरी पर है। इसकी बनावट बाइबिल में लिखे तथ्यों के आधार पर है। यह विशालकाय भवन केवल एक बिम्ब में टिका हुआ है।

कुनकुरी महागिरजाघर की आधारशिला 1962 में रखी गई थी। जिसका एक हिस्सा 1964 में पूरा हुआ, वहीं दूसरा हिस्सा 1979 में पूरा हुआ। इसका लोकार्पण 1982 में हुआ था। जिले में इस चर्च से संबंधित लगभग 2 लाख से अधिक अनुयायी हैं।

image 2025 12 23t174018284 1766492618

बस्तर का ऐतिहासिक लाल चर्च

बस्तर के जगदलपुर में भी एक अंग्रेजी हुकूमत के दौर की ऐतिहासिक चर्च है, जिसे ‘लाल चर्च’ के नाम से जाना जाता है। साल 1890 का वो दौर था जब रायपुर से मिशनरी सीबी वार्ड बैलगाड़ी से बस्तर पहुंचे थे। उन्होंने बस्तर के काकतीय वंश के एक राजा से मुलाकात की।

राजा ने जगदलपुर में उन्हें जमीन दान की। मिशनरी ने 1890 में ही उस जमीन पर चर्च की नींव रख दी। धीरे-धीरे निर्माण काम शुरू किया गया। खास बात यह रही कि, उस दौर में मिशनरियों ने चर्च बनाने के लिए लाल ईंट, बेल फल, गोंद और चूना का इस्तेमाल किया था।

बस्तर में मिशनरी ने 1890 में लाल चर्च की नींव रखी थी

बस्तर में मिशनरी ने 1890 में लाल चर्च की नींव रखी थी

चर्च बनाने के लिए लाल ईंट, बेल फल, गोंद और चूना का इस्तेमाल किया था।

चर्च बनाने के लिए लाल ईंट, बेल फल, गोंद और चूना का इस्तेमाल किया था।

इस चर्च को बनने में करीब 33 साल लग गए थे। मिशनरियों ने इस चर्च को ऐतिहासिक बनाने इस चर्च में सिर्फ एक ही रंग का इस्तेमाल करने का विचार बनाया और लाल रंग का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया था।

121 साल पुरानी रायपुर की सेंट पॉल्स चर्च

राजधानी रायपुर के सुभाष स्टेडियम के पीछे सिविल लाइन स्थित सेंट पॉल्स कैथेड्रल चर्च लगभग 121 साल पुरानी है। सेंट पॉल्स चर्च 1903 में बननी शुरू हुई थी। तब इसकी लागत केवल 7000 रुपए आई थी। इसका शिलान्यास 18 अगस्त 1903 में रायपुर के कमिश्नर फिलिप्स ने किया था। सालभर बाद यह बनकर तैयार हो गया।

ये चर्च जशपुर जिले के कुनकुरी के चर्च के बाद दूसरी बड़ी चर्च मानी जाती है। यहां 15 दिन तक क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। जहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल समेत अनेक जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाता है। सेंट पॉल्स कैथेड्रल चर्च छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी CNI की सदस्यता वाली चर्च है। यहां वर्तमान में 15 हजार से ज्यादा सदस्य हैं। इसके अधीन 22 गिरिजाघर संचालित किए जा रहे हैं।

रायपुर की सेंट पॉल्स कैथेड्रल चर्च लगभग 121 साल पुरानी है

रायपुर की सेंट पॉल्स कैथेड्रल चर्च लगभग 121 साल पुरानी है

यहां 15 दिन तक क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

यहां 15 दिन तक क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

रायपुर की सेंट पॉल्स कैथेड्रल चर्च के अंदर की तस्वीर।

रायपुर की सेंट पॉल्स कैथेड्रल चर्च के अंदर की तस्वीर।

अंग्रेजों के जमाने में कई अंग्रेज पादरियों ने यहां सेवाएं दी। इनमें गॉस साहब, कैंसवर, एसएल जैकब, रेव्ह यीशुदान, रेव्ह एफएस दास, रेव्ह राबर्ट अली, रेव्ह एसके बेरो के नाम प्रमुख हैं। अर्बन एरिया में जितने चर्च थे उनका सेंट्रल सेंट पॉल्स चर्च हुआ करता था। 1929 में बरेली उत्तरप्रदेश के पादरी एनएन शाह ने चर्च के पहले भारतीय पास्टर के रूप में पद संभाला था।

बिलासपुर का डिसाइपल्स ऑफ क्राइस्ट चर्च

बिलासपुर के सिविल लाइन स्थित डिसाइपल्स आफ क्राइस्ट चर्च का इतिहास बेहद खास है। बताया जाता है कि, साल 1890 में महज 30 हजार रुपए में इस चर्च का निर्माण पूरा हुआ था। चर्च का निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था। इस चर्च का ढांचा अब भी पुराना है, जिसमें गर्मियों के समय में पंखे तक की जरूरत नहीं पड़ती।

बिलासपुर के सिविल लाइन स्थित डिसाइपल्स आफ क्राइस्ट चर्च

बिलासपुर के सिविल लाइन स्थित डिसाइपल्स आफ क्राइस्ट चर्च

कम्युनिटी क्रिश्चियन चर्च, भिलाई

भिलाई सेक्टर-6 का क्रिश्चियन कम्युनिटी चर्च 55 साल पुरानी है। यह प्रदेश की इकलौती ऐसी चर्च है, जहां टाइम कैप्सूल दफन है। इस चर्च की खास बात यह है कि यहां देश के सभी राज्यों से क्रिश्चियन परिवार के लोग प्रेयर के लिए आते हैं।

टाइम कैप्सूल चर्च के अंदर पुलपिट के नीचे दफन है और वहीं पर आराधना की जाती है। 25 दिसंबर यानी क्रिसमस के दिन 1965 को इस चर्च में पहली प्रेयर के साथ यादगार समारोह आयोजित किया गया था। तब से भिलाई और दुर्ग में एक-एक करके 50 से ज्यादा चर्च भवन बन चुके हैं।

भिलाई सेक्टर-6 का क्रिश्चियन कम्युनिटी चर्च 55 साल पुराना है।

भिलाई सेक्टर-6 का क्रिश्चियन कम्युनिटी चर्च 55 साल पुराना है।

image 32 1766590076



<



Advertisement Carousel

theblazeenews.com (R.O. No. 13229/12)

×
Popup Image



Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
admin
  • Website

Related Posts

भूपेश पेंड्रा पहुंचे, सराफा व्यापारी के घरवालों से की मुलाकात:पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

June 24, 2026

अपेक्स बैंक के मैनेजर समेत 3 कर्मचारी बर्खास्त:5 आउटसोर्स कर्मी भी हटाए;18 करोड़ के गबन में बड़ी कार्रवाई

June 24, 2026

फरार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर गरमाया मामला:दंतेवाड़ा विधायक बोले- मुख्यमंत्री से करेंगे शिकायत,समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी

June 24, 2026

Comments are closed.

samvad add RO. Nu. 13843/146
samvad add RO. Nu. 13843/146
Stay In Touch
  • Facebook
  • Twitter
  • YouTube
  • Telegram
Live Cricket Match

[covid-data]

Our Visitor

075360
Views Today : 152
Views Last 7 days : 2338
Views Last 30 days : 9997
Total views : 104419
Powered By WPS Visitor Counter
About Us
About Us

Your source for the Daily News in Hindi. News about current affairs, News about current affairs, Trending topics, sports, Entertainments, Lifestyle, India and Indian States.

Our Picks
Language
Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
  • Home
© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.