![]()
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के जिलाध्यक्षों के चयन के लिए संगठन सृजन कार्यक्रम लगभग पूरा हो गया है। अब जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया के बाद ही ब्लॉकों और मंडल अध्यक्षों की सूची जारी की जाएगी।
.
दरअसल, एआईसीसी द्वारा नियुक्त किए गए पर्यवेक्षक जिलेवार सामाजिक संगठनों और अन्य लोगों से रायशुमारी करने के बाद दावेदारों का इंटरव्यू लेकर लौट चुके हैं। वे अपनी रिपोर्ट 22 अक्टूबर को एआईसीसी को सौंपेंगे। इसके ठीक दूसरे दिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को दिल्ली बुलाया गया है।
माना जा रहा है कि पर्यवेक्षकों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पर एआईसीसी महंत और बैज से फीडबैक लेगी। शुरू में जिन राज्यों में संगठन सृजन अभियान चलाया गया था, उनमें यह तय नहीं था कि प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष से फीडबैक लेना है या नहीं।
लेकिन बाद में तय किया गया कि प्रदेश के दोनों महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों से फीडबैक लेना जरूरी है। इसलिए दोनों को दिल्ली बुलाया गया है। माना जा रहा है कि अक्टूबर के अंत या नवंबर के पहले हफ्ते तक जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां कर दी जाएंगी। इसके बाद से मंडल और सेक्टर की सूची जारी होगी।
12 सौ से ज्यादा मंडल बनाएगी कांग्रेस
इस बार 146 ब्लॉक अध्यक्षों को ‘संगठन सृजन’ अभियान से बाहर रखा गया है। ब्लॉक अध्यक्षों की सूची एआईसीसी को भेजी जा चुकी है। मंडल और सेक्टर कमेटियों का गठन हो चुका है। कांग्रेस ने 1200 से ज्यादा मंडल कमेटियां बनाई हैं, जिसमें लगभग 25,000 पदाधिकारी बनाए जाएंगे। प्रत्येक मंडल में एक अध्यक्ष, तीन उपाध्यक्ष, एक कोषाध्यक्ष, तीन सचिव, तीन सहसचिव, एक सोशल मीडिया समन्वयक और नौ कार्यकारिणी सदस्य होंगे।
रायपुर शहर में 30 तो ग्रामीण के लिए 17 का हुआ इंटरव्यू
रायपुर शहर और ग्रामीण के पर्यवेक्षक प्रफुल्ल गुद्दाड़े ने शहर अध्यक्ष के लिए 30 से ज्यादा वहीं ग्रामीण अध्यक्ष पद के लिए 17 दावेदारों का इंटरव्यू लिया था। सभी की किस्मत गुद्दाड़े की रिपोर्ट में कैद हो गई है।
जिलेवार फीडबैक लेगी एआईसीसी, फिर तय होंगे नाम
बताया गया है कि पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट मिलने के बाद एआईसीसी की ओर से संबंधित जिलों के दावेदारों के संबंध में फीडबैक लिया जाएगा। इसमें यह पूछा जाएगा कि जो नाम वहां से भेजे गए हैं, वे अध्यक्ष पद के लिए कितने उपयुक्त हैं। वे किस गुट से ताल्लुक रखते हैं, कांग्रेस के प्रति कितने समर्पित हैं और क्षेत्र में उनकी सक्रियता कितनी है।
यदि किसी भी जिले की रिपोर्ट एकपक्षीय पाई गई तो उसमें देखा जाएगा कि वहां पर सबसे बेहतर और योग्य दावेदार कौन है। एआईसीसी से उसके नाम पर मुहर लगाई जाएगी। इसमें एससी, एसटी, युवा, महिला, ओबीसी, अल्पसंख्यक के साथ ही 50 साल उम्र की सीमा भी देखी जाएगी।
<
