मुंगेली जिला कलेक्टोरेट में खरीफ वर्ष 2026 के लिए खाद और बीज वितरण व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने, वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और कालाबाजारी रोकने पर विस्तार से
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बैठक में विधायक पुन्नूलाल मोहले, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकांत पाण्डेय, कलेक्टर कुन्दन कुमार, एसएसपीभोजराम पटेल, जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय, एसडीएम, प्रगतिशील किसान और थोक उर्वरक विक्रेता मौजूद रहे।

बीज वितरण व्यवस्था को लेकर समन्वय बैठक में विधायक कलेक्टर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
खाद वितरण में पारदर्शिता पर जोर
विधायक पुन्नूलाल मोहले ने कहा कि खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि किसानों की ऋण पुस्तिका में वितरित खाद का अनिवार्य रूप से अंकन किया जाए, ताकि कोई किसान अलग-अलग केंद्रों से बार-बार खाद न उठा सके।
उन्होंने किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड की जानकारी देने और मृदा परीक्षण के आधार पर खाद उपयोग के लिए जागरूक करने पर भी जोर दिया।
यूरिया और डीएपी वितरण के नए नियम
बैठक में खरीफ 2026 के लिए उर्वरक वितरण को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए। तय किया गया कि खरीफ 2025 में किसानों को जितना यूरिया मिला था, उसका 80 प्रतिशत और डीएपी का 60 प्रतिशत ही इस बार वितरित किया जाएगा।
यूरिया की बची 20 प्रतिशत मात्रा पारंपरिक यूरिया उपलब्ध नहीं होने पर नैनो यूरिया के रूप में दी जाएगी। वहीं डीएपी की शेष 40 प्रतिशत मात्रा वैकल्पिक एनपीके उर्वरक या नैनो डीएपी के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी।

जिला और विकासखंड स्तर पर निगरानी दल बनाए गए हैं। शिकायत मिलने पर ये टीमें अचानक निरीक्षण कर कार्रवाई करेंगी।
जिले में 1.29 लाख हेक्टेयर में होगी खेती
बैठक में बताया गया कि खरीफ वर्ष 2026 में जिले में कुल 1 लाख 29 हजार 491 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती प्रस्तावित है। इसमें धान का रकबा 1 लाख 21 हजार 550 हेक्टेयर और अन्य फसलों का रकबा 7 हजार 941 हेक्टेयर रहेगा।
जिनमें सेवा सहकारी समितियों से 38 हजार 185 किसान क्रेडिट कार्ड धारक ऋणी कृषक और अन्य बैंकों से 78 हजार 787 प्रस्तावित किसान क्रेडिट कार्ड धारक शामिल हैं। जिले में कुल 1 लाख 16 हजार 972 किसान हैं। इनमें 64 हजार 335 सीमांत किसान, 40 हजार 940 लघु किसान और 11 हजार 697 बड़े किसान शामिल हैं।
कालाबाजारी रोकने निगरानी दल गठित
खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर कुंदन कुमार के निर्देश पर जिला और विकासखंड स्तर पर निगरानी दल बनाए गए हैं। शिकायत मिलने पर ये टीमें औचक निरीक्षण कर कार्रवाई करेंगी।
कृषि विभाग ने जिला स्तर पर कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जहां किसान शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
सीमांत, लघु और बड़े किसानों के लिए अलग व्यवस्था
बैठक में किसानों की जमीन के अनुसार खाद वितरण की अलग-अलग व्यवस्था तय की गई।
- 2.5 एकड़ तक भूमि वाले सीमांत किसानों को खाद एकमुश्त दिया जाएगा।
- 2.5 से 5 एकड़ तक वाले लघु किसानों को यूरिया दो किश्तों में मिलेगा।
- 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले बड़े किसानों को यूरिया तीन किश्तों में वितरित किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि वैज्ञानिकों की अनुशंसा के अनुसार जैविक खाद, जैव उर्वरक, हरी खाद और नील हरित काई जैसे वैकल्पिक उपायों को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि संतुलित उर्वरक उपयोग सुनिश्चित हो सके।
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