धमतरी के माँ अंगारमोती मंदिर में इस साल नवरात्रि के दौरान 5 हजार से अधिक आस्था के ज्योत प्रज्वलित किए गए हैं। इनमें 22 विदेशी भक्तों द्वारा जलवाए गए मनोकामना ज्योत भी शामिल हैं। मंदिर में भक्तों को 24 घंटे माता के सुगम दर्शन मिल रहे हैं, जिससे श्रद्ध
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धमतरी जिला मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित मां अंगारमोती मंदिर को वन देवी के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश-विदेश में भी अपनी ख्याति के लिए प्रसिद्ध है। क्वार नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।

मंदिर ट्रस्ट द्वारा सेवादारों और पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारू रहे। ज्योत प्रज्वलित कराने के लिए भक्तों ने मंदिर में रसीद कटवाने के साथ-साथ स्कैनर और मोबाइल के माध्यम से भी बुकिंग कराई थी। दिनभर विभिन्न टोलियों द्वारा जससेवा का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर में महिलाओं को सिर ढककर प्रवेश करने की अनुमति नहीं है।

मां अंगारमोती के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने मां अंगारमोती की महिमा के बारे में बहुत सुना है और यह मान्यता वाली माता हैं। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि यहां माता के दर्शन आसानी से हो रहे हैं, जबकि अन्य मंदिरों में कई घंटों तक कतार में खड़ा रहना पड़ता है।
कुछ भक्तों ने कहा कि ज्योत दर्शन करके उनका मन पवित्र हो गया है। उनका मानना है कि माता के दर्शन मात्र से ही उनकी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। नवरात्रि के दौरान माता का श्रृंगार अत्यंत मनमोहक होता है।

श्रद्धालुओं ने बताया कि धमतरी की वनदेवी माता हैं। यहां के ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं के लिए अच्छी व्यवस्था की है। अंगारमोती माता मंदिर पहुंचते ही कई समूह जस सेवा करते नजर आते हैं, जो नवरात्रि में लगातार चल रही है। माता के सामने जाने के बाद सकारात्मक माहौल महसूस होता है।
मंदिर में सेवा कर रही महिलाओं ने कहा कि भक्तों में बहुत उत्साह है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आ रहे हैं। उनके लिए भंडारे का भी आयोजन किया गया है। माता की इतनी प्रसिद्धि है कि लोग दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं और माता को छूकर प्रणाम करते हैं। खासकर महिलाओं को दर्शन करने से पहले ढके हुए सिर को खोलने दिया जा रहा है।
माता अंगारमोती ट्रस्ट के अध्यक्ष जीवराखन लाल मराई ने बताया कि इस साल भी 5,373 श्रद्धालुओं ने मंदिर में ज्योत प्रज्वलित की है। इनमें 22 ज्योतें विदेशों से आए भक्तों ने भी जलायी हैं। कई अन्य राज्यों के लोग भी यहां ज्योत जलाने आते हैं। माता की प्रसिद्धि दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है, जिसे देखकर सभी हैरान हैं।
अध्यक्ष ने बताया कि हजारों साल पहले माता चंवर क्षेत्र में विराजमान थीं, जहां लोग महानदी पार करके दर्शन करने जाते थे। सन 1974-75 में जब गंगरेल डैम बना, तब 52 गांव डूब गए। इसके बाद माता अंगारमोती का मंदिर गंगरेल में स्थापित किया गया।
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