Monsoon Session No-Confidence Motion Against Sai Govt

रायपुर21 मिनट पहले
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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन शुक्रवार को साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सदन में प्रस्ताव पेश करेंगे। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष अपनी-अपनी बात रखेंगे।
राज्य गठन के बाद यह विधानसभा में किसी सरकार के खिलाफ लाया गया 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले 9 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है, लेकिन एक भी सरकार नहीं गिरी। विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी बहस 2015 में तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सदन में प्रस्ताव पेश करेंगे।
अविश्वास प्रस्ताव क्यों अहम?
अविश्वास प्रस्ताव का मकसद केवल सरकार गिराना नहीं होता। विपक्ष इस बहस के जरिए सरकार के पूरे कार्यकाल के कामकाज पर सवाल उठाता है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाता है और विपक्ष के आरोपों का जवाब देता है। चर्चा के बाद अगर मत विभाजन की स्थिति होती है, तब मतदान होता है। अगर सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव स्वत: गिर जाता है। कई बार ध्वनिमत से ही फैसला लिया जाता है।
इस बार कांग्रेस नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों का पक्ष रखेगी।
विधानसभा में बीजेपी के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। ऐसे में संख्या बल बीजेपी के पक्ष में है। यही वजह है कि प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व अधिक है, जबकि गणित सरकार के पक्ष में दिखाई देता है।


अब तक का रिकॉर्ड भी सरकार के पक्ष में
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में अब तक 9 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है। हर बार सरकार बहुमत साबित करने में सफल रही है। पहली विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ 2002 और 2003 में भाजपा ने दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया था।
इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में कुल पांच बार कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। वहीं भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ 2022 और 2023 में भाजपा अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। इन सभी प्रस्तावों पर लंबी बहस हुई, लेकिन कोई भी पारित नहीं हो सका।
सबसे लंबी चर्चा जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी। मंगलवार को विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ पेश होने वाला अविश्वास प्रस्ताव राज्य गठन के बाद 10वां होगा।
भूपेश सरकार में भी लाया गया था अविश्वास प्रस्ताव
प्रदेश में भूपेश बघेल (कांग्रेस) की पूर्ववर्ती सरकार के खिलाफ छत्तीसगढ़ विधानसभा में दो बार साल 2022 और 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव पर 12 घंटे 32 मिनट चर्चा चली थी।
जबकि जुलाई 2023 के मानसून सत्र के दौरान बीजेपी ने सरकार के खिलाफ 109 बिंदुओं का आरोप-पत्र पेश किया था। हालांकि, भारी बहुमत (कांग्रेस के 72 विधायक) के कारण यह प्रस्ताव विधानसभा में ध्वनिमत से गिर गया था ।
प्रश्नकाल में भी कई अहम मुद्दे
प्रश्नकाल के दौरान कई अहम मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विधायक शेषराज हरवंश राज्य में चावल की आवश्यकता, केंद्रीय और राज्य पूल से उसकी पूर्ति की स्थिति को लेकर खाद्य मंत्री से सवाल करेंगी। भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला राशन दुकानों के बचत स्टॉक के सत्यापन का मुद्दा उठाएंगे। वहीं विधायक नीलकंठ टेकाम धान खरीदी केंद्रों से जुड़े सवाल करेंगे।
कांग्रेस विधायक उमेश पटेल महतारी वंदन योजना में अपात्रता के आधार को लेकर सरकार से जवाब मांगेंगे, जबकि विधायक अनिला भेंडिया मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में वित्तीय विसंगतियों का मुद्दा उठाएंगी। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन, शिकायतों के निराकरण और शॉर्टेज (कमी) की स्थिति को लेकर सरकार को घेरेंगे।
मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल में मुख्य रूप से खाद्य, नागरिक आपूर्ति, महिला एवं बाल विकास तथा सहकारिता विभाग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इन विषयों पर मंत्री दयालदास बघेल और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अपने-अपने विभागों की ओर से जवाब देंगे।
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प्रश्नकाल में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल फर्जी ग्रामसभाओं का मामला उठाया।
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