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Home » Low marks in quarterly and half-yearly exams will worsen the result, now both the marks will be added in the annual exam. | बदलाव: तिमाही-छमाही में कम अंक तो बिगड़ेगा रिजल्ट, अब वार्षिक में जुड़ेंगे दोनों के अंक – Raipur News
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Low marks in quarterly and half-yearly exams will worsen the result, now both the marks will be added in the annual exam. | बदलाव: तिमाही-छमाही में कम अंक तो बिगड़ेगा रिजल्ट, अब वार्षिक में जुड़ेंगे दोनों के अंक – Raipur News

By adminOctober 17, 2025No Comments4 Mins Read
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राज्य में पहली से नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा के रिजल्ट का फार्मूला बदल दिया गया है। अब तिमाही और छमाही परीक्षा के अंक वार्षिक परीक्षा के रिजल्ट में जोड़े जाएंगे। तिमाही छमाही परीक्षा में कम अंक आने पर वार्षिक परीक्षा का रिजल्ट प्रभावित होगा।

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ये सिस्टम चालू शिक्षा सत्र से ही लागू कर दिया गया है। हालांकि बोर्ड परीक्षाओं यानी कक्षा 10वीं और 12वीं में ये फार्मूला लागू नहीं किया गया है। शिक्षा विभाग के इस फैसले में 10वीं-12वीं के छात्रों को छोड़कर राज्य के लगभग 45 लाख छात्र प्रभावित होंगे।

शिक्षा विभाग ने चालू शिक्षा सत्र से ही रिजल्ट का नया फार्मूला लागू कर दिया है। राज्य के सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को रिजल्ट के नए फार्मूले के संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अफसरों का कहना है कि मौजूदा सिस्टम में ज्यादातर स्कूलों में परीक्षा केवल औपचारिकता निभाने के लिए ली जाती है।

जबकि तिमाही-छमाही टेस्ट छात्रों के तीन और छह माह की तैयारियों का आकलन करने के लिए आयोजित होते हैं। इसके बावजूद लापरवाही बरती जाती है। अब चूंकि दोनों परीक्षाओं के अंक जोड़ने का निर्णय लिया गया है, इससे इन दोनों परीक्षाओं के प्रति गंभीरता बढ़ेगी और पढ़ाई का स्तर भी सुधरेगा।

तिमाही के 20% और छमाही 30% अंक अधिभार के रूप में जोड़ेंगे

ये है रिजल्ट तैयार करने का फार्मूला

  • कक्षा पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी में तिमाही व छमाही परीक्षा में प्रत्येक विषय में प्राप्त अंकों का 20-20 प्रतिशत अधिभार के रूप में जोड़ा जाएगा। यानी तिमाही-छमाही का 20-20 प्रतिशत और वार्षिक का 60 प्रतिशत मिलाकर ही परीक्षाफल तैयार किया जाएगा।
  • कक्षा 5वीं एवं 8वीं की वार्षिक परीक्षा में छमाही परीक्षा के प्रत्येक विषय में प्राप्त अंकों का 30 फीसदी अधिभार के रूप में जोड़ा जाएगा। यानी छमाही का 30 फीसदी एवं वार्षिक का 70 फीसदी मिलाकर परीक्षाफल तैयार किया जाएगा।

फेल करने का नियम बदला राज्य में 2010 के पहले भी कुछ शिक्षा सत्रों में वार्षिक परीक्षाफल तैयार करने का यही सिस्टम लागू किया गया था। उस समय भी तिमाही व छमाही परीक्षा के अंकों को जोड़कर वार्षिक परीक्षा का रिजल्ट तैयार किया जाता था। 2010 में आरटीई यानी शिक्षा का अधिकार कानून लागू हो गया है।

उसमें कक्षा पहली से आठवीं तक के छात्रों को फेल करने का नियम ही बदल दिया गया। यानी पहली से आठवीं तक सभी छात्रों को अनिवार्य रूप से पास करने का सिस्टम लागू कर दिया गया। उसके बाद से मूल्यांकन का फार्मूला बदल दिया गया।

9वीं-11वीं के रिजल्ट पर अंतिम निर्णय माशिमं से सहमति के बाद शिक्षा विभाग ने कक्षा 9वीं एवं 11वीं के लिए भी छमाही परीक्षा के प्रत्येक विषय में प्राप्त अंकों का 30 फीसदी अधिभार के रूप में जोड़ने का निर्णय लिया है। लेकिन अभी इसे पूरी तरह लागू नहीं किया जा रहा है। इस बारे में माध्यमिक शिक्षा मंडल को पत्र लिखकर वहां से राय मांगी गई है। मंडल से सहमति मिलने के बाद ही 9वीं और 11वीं के लिए निर्णय लिया जाएगा। इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारियों को भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है।

भास्कर एक्सपर्ट – मूल्यांकन अच्छे से किया जाए तो ये बेहतर निर्णय है

ये सतत मूल्यांकन का फार्मूला है। कई बार ऐसा होता है कि छात्र ब्रिलियंट होता है, लेकिन कई कारणों से फायनल एग्जाम में बेहतर परफार्मेंस नहीं दे पाता। इसके कई कारण हो सकते हैं। लेकिन छात्र को दूसरा मौका नहीं मिल पाता और उसका रिजल्ट बिगड़ जाता है।

ऐसी स्थिति में तिमाही-छमाही वाला फार्मूला बेहतर साबित होगा। इसमें छात्र तिमाही, छमाही में अगर अच्छे अंक पाते हैं तो उन्हें फायनल एग्जाम में मदद मिलेगी। लेकिन इस सतत मूल्यांकन की प्रक्रिया में गंभीरता और ईमानदारी होनी चाहिए। ये फार्मूला पहले भी लागू किया गया था। उस समय भी खामियां थीं। इस बार अगर उसी फार्मूले को फिर लागू किया जा रहा है तो ये अच्छा है। इसका स्वागत करना चाहिए। – बीकेएस रे, रिटायर्ड आईएएस और शिक्षाविद



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