दुर्ग में रिसामा गांव के ग्रामीण स्कूल में तालाबंदी कर दिए थे।
दुर्ग ब्लॉक के रिसामा गांव में 13 अक्टूबर को ग्रामीणों ने प्राथमिक शाला में तालाबंदी कर दी। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में पदस्थ तीनों शिक्षक कई दिनों से अनुपस्थित हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई ठप हो गई है। यह घटना शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के गृह ज
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ग्रामीणों ने बताया कि रिसामा प्राथमिक शाला में कक्षा पहली से पांचवी तक के लगभग 80 विद्यार्थी पढ़ते हैं। यहां हेडमास्टर नरेश ठाकुर और दो सहायक शिक्षक मोहन सिंह ठाकुर व गेश्वर राजू साहू पदस्थ हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, हेडमास्टर 11 अक्टूबर तक अवकाश पर थे, लेकिन 12 और 13 अक्टूबर को बिना सूचना के अनुपस्थित रहे। वहीं, अन्य दो शिक्षक बीएलओ ड्यूटी के नाम पर कई दिनों से स्कूल नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि पिछले 15 दिनों से स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं आया।

ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में 15 दिन से कोई पढ़ाने नहीं आया।
पिछले 15 दिनों से स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं आया
गांव के उपसरपंच मन्नूलाल साहू और दिलेश कुमार साहू ने बताया कि पिछले 15 दिनों से स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं आया है। बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से रुक गई है।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अपना नाम लिखना तक नहीं आता। शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था भी अव्यवस्थित हो गई है।
शिक्षा मंत्री के गृह जिले को लेकर उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि दुर्ग जिला प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह जिला है। ऐसे में यहां की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन स्थिति इसके विपरीत है।
शिक्षा मंत्री ने स्वयं विभाग के उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि स्कूल समय में किसी भी तरह का प्रशिक्षण या अन्य कार्य न रखा जाए, ताकि शिक्षक नियमित रूप से स्कूल में उपस्थित रहें।

निरीक्षण के लिए पहुंचे अधिकारी
मामले की जानकारी दैनिक भास्कर की टीम द्वारा दुर्ग ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को दिए जाने के बाद बीआरसी और एसआरसी को मौके पर भेजा। टीम ने स्कूल पहुंचकर निरीक्षण किया और ग्रामीणों से चर्चा कर शिक्षकों की अनुपस्थिति की शिकायतें सुनीं।
मिडिल स्कूल प्राचार्य ने दी सफाई
मिडिल स्कूल रिसामा के प्राचार्य गजेन्द्र चंद्राकर ने बताया कि दो शिक्षकों को एसडीएम कार्यालय से बीएलओ ड्यूटी का आदेश मिला है। वहीं प्रधान पाठक नरेश ठाकुर ने 11 अक्टूबर तक अर्जित अवकाश का आवेदन दिया था, लेकिन स्वीकृति नहीं ली। 12 और 13 अक्टूबर को वे बिना सूचना अनुपस्थित रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उच्च अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचते और ठोस कार्रवाई का आश्वासन नहीं देते, तब तक स्कूल का ताला नहीं खोला जाएगा। उन्होंने मांग की कि बच्चों की पढ़ाई नियमित रूप से हो और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
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