बिलासपुर उपभोक्ता आयोग ने तकनीकी दांव-पेच के जरिए क्लेम खारिज करने वाली बीमा कंपनी LIC को तगड़ा झटका दिया है। …और पढ़ें

HighLights
- उपभोक्ता को एलआइसी ने बीमा राशि देने किया इन्कार, फोरम ने पलटा आदेश
- देय तिथि को अनु्ग्रह अवधि में शामिल करना बीमा कंपनी की बड़ी विधिक भूल
- बिलासपुर उपभोक्ता आयोग ने मृतक के भाई को ब्याज सहित भुगतान करने के दिए निर्देश
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: दावा राशि दबाने के लिए तकनीकी दांव-पेचों में उपभोक्ताओं को उलझाने वाली, बीमा कंपनियों की मनमानी पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने रोक लगाने वाला निर्णय दिया है। एलआइसी द्वारा अनुग्रह अवधि की गलत और त्रुटिपूर्ण विधिक गणना कर क्लेम खारिज किए जाने के फैसले को आयोग ने सिरे से खारिज कर दिया। अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल की पीठ ने परिवादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी को सेवा में कमी का दोषी पाया है।
रतनपुर थाना क्षेत्र के मदनपुर रानीगांव निवासी प्रदीप कुमार वैष्णव ने अपने दिवंगत भाई सनत कुमार वैष्णव की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद एलआइसी में डेथ क्लेम प्रस्तुत किया था। मृतक ने अपने जीवनकाल में तीन लाख रुपये की जीवन लक्ष्य पालिसी ली थी, जिसमें एक्सीडेंटल डेथ बेनिफिट और टीए राइडर के तहत कुल नौ लाख रुपये का कवर शामिल था। पालिसी की त्रैमासिक प्रीमियम देय तिथि 28 दिसम्बर 2024 थी।
प्रीमियम जमा न होने के कारण 27 जनवरी 2025 को सड़क हादसे में हुई मौत के बाद एलआइसी ने यह कहते हुए दावा निरस्त कर दिया कि पालिसी 26 जनवरी को ही लैप्स (कालातीत) हो चुकी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी के ब्रोसर और विधिक नियमों की विस्तृत समीक्षा की। आ
योग ने द जनरल क्लाज एक्ट 1897 की धारा 9 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि ग्रेस पीरियड की गणना करते समय प्रीमियम की देय तिथि प्रथम दिन को शामिल नहीं किया जा सकता। इस विधिक नियम के तहत 28 दिसंबर से 30 दिनों की अनुग्रह अवधि जोड़ने पर पालिसी 27 जनवरी की रात 12 बजे तक पूरी तरह वैध और प्रभावी थी। आयोग ने एलआइसी को आदेश दिया है कि वह 45 दिनों के भीतर पूरी क्लेम राशि का नौ प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करे।
बीमा कंपनी की चालाकी और विधिक गणित
- एलआइसी का तर्क था कि बीमा कंपनी देय तिथि 28 दिसंबर को पहला दिन मानकर 30 दिन की गणना कर रही थी, जिससे उनके कागजों में पालिसी 26 जनवरी को लैप्स हो गई और 27 जनवरी को हुई मौत को क्लेम के दायरे से बाहर कर दिया गया।
- विधिक निर्णय के अनुसार यह है कि कानूनन देय तिथि को छोड़कर अगले दिन से 30 दिनों की गिनती शुरू होती है। इस सही गणना से पालिसी 27 जनवरी की आधी रात तक प्रभावी थी, जिसके भीतर ही दुर्घटना हुई थी।
मानसिक क्षतिपूर्ति और वाद व्यय का भी लगेगा झटका
उपभोक्ता आयोग ने केवल मूल दावों को ही मंजूरी नहीं दी है, बल्कि उपभोक्ता को परेशान करने के एवज में एलआइसी पर हर्जाना भी लगाया है। आदेश के मुताबिक, परिवादी को हुए शारीरिक और मानसिक कष्ट की पूर्ति के लिए बीमा कंपनी को 25 हजार रुपये का अलग से भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त, कानूनी लड़ाई में हुए वाद व्यय और अधिवक्ता शुल्क के रूप में पांच हजार रुपये पृथक से देने के निर्देश दिए गए हैं।
बीमा पालिसियों में अनुग्रह अवधि (ग्रेस पीरियड) का प्रविधान उपभोक्ताओं को बिना किसी बाधा के रिस्क कवर देने के लिए होता है। गणना के दौरान प्रीमियम देय तिथि को शामिल करना विधिक और तथ्यात्मक रूप से पूरी तरह गलत है। इस अवधि के भीतर बीमित की मृत्यु होने पर नामिनी को समस्त हितलाभ पाने का पूर्ण विधिक अधिकार है। कंपनी द्वारा दावा अस्वीकार करना सेवा में गंभीर कमी है। आलोक कुमार पांडेय, सदसय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बिलासपुर
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