![]()
.
जिले के साहित्यकार संतोष श्रीवास्तव सम की कृति आत्मकथा मेरा जीवन सफर (बचपन से पचपन तक) का लोकार्पण किया गया। आयोजन जगन्नाथ मंदिर राजापारा में वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिती में पुरोहित हरिश पांडे ने मंत्रोच्चारण के साथ किया। उक्त पुस्तक में साहित्यकार सम के बचपन से पचपन तक की आयु के उनके व्यक्तित्व व कृतित्व का उल्लेख है।
आत्मकथा की विधा में प्रस्तुत इस कृति की भूमिका वरिष्ठ साहित्यकार शिव सिंह भदौरिया ने लिखी है। उन्होंने संतोष की जीवन यात्रा का उल्लेख करते कहा है संतोष श्रीवास्तव सम का जीवन संघर्षशील रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी को अपना आदर्श माना है। ईश्वर के प्रति दृढ़विश्वास व आत्मविश्वास से भरा उनका जीवन सफर रहा है। इस आत्मकथा में लेखक के अब तक के जीवन काल के तमाम उन पहलुओं का उल्लेख है जो अनछुए हैं। उनका साहित्य, समाज व राष्ट्र के प्रति चिंतन व कार्य का विस्तार कांकेर सहित दमोह, जगदलपुर, केशकाल, भानुप्रतापपुर आदि स्थानों में भी देखने को मिलता है।
साहित्य व समाज के प्रति उनका कार्य सराहनीय रहा है, जिसे उनकी आत्मकथा पढ़कर समझा व जाना जा सकता है। प्राचीन जगन्नाथ मंदिर कांकेर के शांत वातावरण में यह पुस्तक लोकार्पित करवा उन्होंने ईश्वर के प्रति अपनी आस्था व अपने सादे जीवन व उच्च विचार का ही प्रकटीकरण किया है। आत्मकथा के लोकार्पण अवसर पर जिले के साहित्यकार सुरेश चंद्र श्रीवास्तव, अनुपम जोफर, शिव सिंह भदौरिया, हरिश पांडे, मीरा आर्ची, राजेश शुक्ला, गणेश यदु, रश्मि अग्निहोत्री, देवव्रत शर्मा, सनत जैन, उमेश कुमार, संजय सोनपिपरे, डॉ. गीता शर्मा, रोहित सिन्हा, अनुरमा शुक्ला, पल्लवी व अन्य रहे।
<
