कोंडागांव जिले में जनगणना 2027 के सफल आयोजन के लिए जागरूकता अभियान तेज कर दिया गया है। ग्राम बड़ेकनेरा में रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया, जहां ग्रामीणों को जनगणना के महत्व और प्रक्रिया से अवगत कराया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति तक सही जा
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चौपाल में ग्राम सरपंच प्रकाश चुरगिया ने स्थानीय हल्बी बोली में ग्रामीणों को संबोधित किया। उन्होंने जनगणना के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि शासन की योजनाओं के निर्माण और संसाधनों के सही वितरण का आधार है। इसलिए प्रत्येक नागरिक की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

स्व-गणना प्रक्रिया और प्रथम चरण की जानकारी
इस अवसर पर वेणुगोपाल राव ने जनगणना की स्व-गणना प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोग स्वयं भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं, जिससे यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी। उन्होंने यह भी सूचित किया कि आगामी 01 मई से 30 मई तक जनगणना के प्रथम चरण में मकान गणना की जाएगी, जिसके तहत प्रगणक घर-घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।
सही जानकारी देने की अपील
रात्रि चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों से अपील की गई कि वे प्रगणकों को सही, स्पष्ट और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराएँ, ताकि आंकड़ों में किसी प्रकार की त्रुटि न हो। अधिकारियों ने जोर दिया कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों की दिशा निर्धारित करते हैं। इस जागरूकता अभियान से ग्रामीणों में न केवल जनगणना के प्रति समझ बढ़ी, बल्कि उन्होंने इसमें सक्रिय भागीदारी का संकल्प भी लिया।

कोंडागांव नक्सल मुक्त घोषित
छत्तीसगढ़ शासन ने कोंडागांव जिले को पूर्णतः नक्सल मुक्त घोषित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण घोषणा के बाद जिले में शांति, सामान्य स्थिति और विकास कार्यों को नई दिशा मिल गई है। वर्षों से नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा यह क्षेत्र अब तेजी से सामान्य जनजीवन की ओर लौट रहा है।
नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान जिले के घने जंगलों, पहाड़ी और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल द्वारा कैमफ्लाज (छद्मावरण) वर्दी का उपयोग किया जाता था। यह वर्दी रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण रही, जिससे जवानों को छिपाव, सुरक्षा और ऑपरेशन में बढ़त मिलती थी। इन अभियानों की सफलता में इस वर्दी की अहम भूमिका रही है।
अब पुलिसिंग में बदलाव, खाकी वर्दी में नजर आ रहे जवान
कोंडागांव के नक्सल मुक्त होने के बाद पुलिसिंग के तौर-तरीकों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा जनता के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से अब सभी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी के दौरान पारंपरिक खाकी वर्दी में नजर आ रहे हैं।

खाकी वर्दी बनी विश्वास का प्रतीक
प्रशासन का मानना है कि खाकी वर्दी केवल पुलिस की पहचान ही नहीं, बल्कि जनता और पुलिस के बीच विश्वास का सेतु भी है। इससे पुलिस बल अधिक सुलभ, पहचानने योग्य और जवाबदेह बनेगा, जिससे आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना और मजबूत होगी।
शांति से विकास की ओर बढ़ता कोंडागांव
यह बदलाव केवल वर्दी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पूरे जिले में शांति और सामान्य जीवन की बहाली का प्रतीक माना जा रहा है। यह संकेत है कि अब कोंडागांव विकास और जनकल्याण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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