कोंडागांव जिले की पारंपरिक शिल्पकला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इस पहल के तहत स्थानीय शिल्पकारों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिजाइन (IICD), जयपुर के विशेषज्ञों ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कोंडागांव के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शिल्पकारों के कौशल को समझा और उनके कार्यों का गहन अवलोकन किया।
दौरे के दौरान राज्य कार्यालय से सहायक राज्य कार्यक्रम प्रबंधक मनोज मिश्रा उपस्थित रहे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोण्डागांव अविनाश भोई के मार्गदर्शन में जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुंजलाल सिन्हा ने शिल्पकारों और IICD विशेषज्ञों के बीच समन्वय स्थापित किया।

शिल्पकारों के कौशल की सराहना
विशेषज्ञों ने कोंडागांव के शिल्पकारों के अद्भुत कौशल और सृजनात्मकता की सराहना की। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इन उत्पादों को आधुनिक डिजाइन, बेहतर फिनिशिंग और प्रभावी ब्रांडिंग का सहयोग मिले, तो इनके बाजार मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
बाजार रुझान और पैकेजिंग पर जोर
विशेषज्ञों ने शिल्पकारों को बाजार के नए रुझानों, ग्राहकों की पसंद और आकर्षक पैकेजिंग के महत्व के बारे में जागरूक किया। इससे शिल्पकार अपने उत्पादों को अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बना सकेंगे।

जयपुर में विशेष प्रशिक्षण का अवसर
इस पहल को आगे बढ़ाते हुए IICD जयपुर ने बस्तर के शिल्पकारों को जयपुर में विशेष प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया है। इस प्रशिक्षण में उन्हें ई-कॉमर्स, डिजाइन नवाचार और आधुनिक विपणन तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
शिल्पकारों के लिए नए अवसर
इस प्रशिक्षण से शिल्पकारों को आधुनिक डिजाइन, पैकेजिंग और ब्रांडिंग में दक्षता मिलेगी। साथ ही, उन्हें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने के तरीके भी सिखाए जाएंगे।
जयपुर में मिलने वाले प्रशिक्षण और एक्सपोजर से शिल्पकारों के लिए नए अवसर खुलेंगे, जिससे उनके उत्पादों की मांग और आय में वृद्धि होने की संभावना है।
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