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शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टटेंगा में विश्व एड्स दिवस पर एचआईवी एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने और प्रभावित लोगों के प्रति सहयोग व संवेदनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष की थीम रही मेरा स्वास्थ्य-मेरा अधिकार। कार्यक्रम की शुरुआत में व्याख्याता हेपशीबा एंथोनी ने प्राचार्य आरके देवांगन को रेड रिबन लगाकर स्वागत किया। इसके बाद सभी शिक्षक व विद्यार्थियों को भी रेड रिबन लगाया गया, जो एड्स जागरूकता का प्रतीक है।
प्राचार्य देवांगन ने कहा कि एड्स के बारे में व्यापक जानकारी ही इसका सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने कहा कि बीमारी से मौत होने पर शोक मनाने से बेहतर है कि लोगों तक सही जानकारी पहुंचे और संक्रमण से बचाव हो। कार्यक्रम का संचालन करते हुए व्याख्याता अजय पाठक ने बताया कि एड्स का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो डिफिशिएंसी सिंड्रोम है, जबकि इसका वायरस एचआईवी ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस कहलाता है। यह मनुष्य की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है । व्याख्याता हेपशीबा एंथोनी ने संक्रमण के कारणों और बचाव की जानकारी देते हुए कहा कि संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित संबंध, संक्रमित सुई, ब्लेड या सिरिंज का उपयोग, बिना जांच किए रक्त चढ़ाने जैसे कारणों से यह बीमारी फैल सकती है। उन्होंने डिस्पोज़ल सिरिंज और जांच किए गए रक्त के उपयोग पर जोर दिया।
संवेदनशीलता- सहयोग से मिट सकेगी सामाजिक दूरी वरिष्ठ व्याख्याता टीएल देवांगन ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए कहा कि समाज को मिलकर संक्रमित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए और इस बुराई को जड़ से खत्म करने में सहयोग देना चाहिए। लक्ष्य कुमार, चंद्रहास, कुमकुम, कुसुम, दिव्या, तारिणी, नगमा, लक्ष्मी, चेलेस, हिमांशु, साक्षी और मोहित ने एचआईवी, एड्स विषय पर चित्रकला प्रस्तुत की। कार्यक्रम में वरिष्ठ व्याख्याता चंद्रमणि वासनिक, रेशमी साहू, चंद्रा देबनाथ, पवन सिन्हा, हर्षा देवांगन, रीना बोरकर, भागवत साहू, वेद प्रकाश साहू, महेश रावटे, रवि देवांगन, बिंदु पटेल, बिंदु साहू सहित विद्यार्थी उपस्थित थे।
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