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कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नोनबिर्रा के खलारीपारा में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि 13 जून 2026 को वन विभाग के अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ खसरा नंबर 597 पर बने 20 आदिवासी परिवारों के मकानों को जेसीबी से ध्वस्त कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई नोटिस या सूचना नहीं दी गई। ग्रामीणों के अनुसार, मकान तोड़े जाने के दौरान घरों में मौजूद महिलाओं ने विरोध किया तो उनके साथ हाथापाई और दुर्व्यवहार किया गया। आरोप है कि महिलाओं को जबरन घसीटकर घरों से बाहर निकाला गया। लोगों को आई चोटें घटना में तीज कुंवर (65) के हाथ में गंभीर चोट आई, जबकि राम कुंवर (60) के सिर पर चोट लगी। वहीं, ललिता बाई (35) ने आरोप लगाया कि महिला पुलिसकर्मियों ने उनका हाथ पकड़कर उन्हें जबरन बाहर खींचा। कार्रवाई में कांति बाई, शिवकुमारी बाई, श्याम बाई, भवरमति, राधा बाई, कमला बाई समेत 20 परिवारों के मकान ध्वस्त हो गए। पीड़ितों का कहना है कि प्रत्येक परिवार का 10 से 15 हजार रुपये मूल्य का घरेलू सामान, राशन, कपड़े और बर्तन मलबे में दबकर नष्ट हो गया। 25 वर्षों से रह रहे थे परिवार ग्रामीणों का दावा है कि वे गोंड जनजाति से संबंधित हैं और पिछले करीब 25 वर्षों से उक्त भूमि पर निवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब उन्होंने वन विभाग के कर्मचारियों से बारिश के मौसम में रहने की व्यवस्था के बारे में पूछा तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बारिश के बीच मकान टूटने के बाद प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था किए इस तरह की कार्रवाई मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रियाओं के विपरीत है। थाना में शिकायत, कार्रवाई की मांग घटना के बाद सोमवार को पीड़ित ग्रामीणों ने पाली थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ताओं में तीज कुंवर, राम कुंवर, ललिता बाई, कांति बाई, शिवकुमारी बाई, श्याम बाई, भवरमति, राधा बाई, कमला बाई और कुलदीप सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि कथित मारपीट और दुर्व्यवहार में शामिल वन विभाग एवं पुलिस कर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो तथा प्रभावित परिवारों को तत्काल आवास, राहत सामग्री और उचित मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। आंदोलन की चेतावनी पीड़ित परिवारों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन और चक्काजाम जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि न्याय नहीं मिलने की स्थिति में क्षेत्र में व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल मामले को लेकर वन विभाग और प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत के आधार पर पुलिस मामले की जांच कर रही है।
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