छत्तीसगढ़

कामधेनु विश्वविद्यालय में 130 पदों की भर्ती प्रक्रिया पर रोक, राज्यपाल की उप सचिव ने जारी किया आदेश

दुर्ग स्थित दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय अंजोरा में विभिन्न पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है। कार्य परिषद सदस्यों की शिकायत और मांग के बाद यह कार्रवाई की गई है।

राज्यपाल की उप सचिव निधि साहू ने भर्ती पर रोक का आदेश जारी किया है। विश्वविद्यालय में कुल 130 पदों पर भर्ती होनी थी, जिसमें प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद शामिल हैं।

विश्वविद्यालय के कार्य परिषद (ईसी) सदस्यों ने कुलपति को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया को तुरंत स्थगित करने की मांग की थी। पत्र में बताया गया कि भर्ती प्रक्रिया गंभीर विवादों के घेरे में है।

सदस्यों ने बैकलॉग पदों की भर्ती, विज्ञापित पदों की नियुक्ति, वेतन संरक्षण, पहले से तय रोस्टर में बदलाव, विभागवार पदों का निर्धारण, आरक्षण और रोस्टर निर्धारण में गड़बड़ी, स्वीकृत सेटअप से अधिक पदों पर विज्ञापन, स्थानीय शिक्षकों की पदोन्नति और नियमों के विरुद्ध दीर्घकालीन स्थापना जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए थे। साथ ही आरोप लगाया कि कार्य परिषद के सदस्यों से अनुमोदन भी नहीं लिया गया।

ईसी सदस्यों ने अपने पत्र में दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर और अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का भी उल्लेख किया। बताया कि दोनों जनप्रतिनिधियों ने 19 अगस्त को राज्यपाल को पत्र लिखकर भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर चिंता जताई थी।

दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर ने विधानसभा में कामधेनु विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया था। उन्होंने भवन निर्माण, रखरखाव कार्यों में गड़बड़ी और शैक्षणिक पदों की भर्ती में अनियमितता को लेकर सवाल लगाए थे और कृषि मंत्री रामविचार नेताम से भी इसकी शिकायत की थी।

भर्ती प्रकिया पर रोक के बाद बीजेपी विधायक ललित चंद्राकर ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व वाली हमारी सरकार में युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारी सरकार में सभी सरकारी पदों पर भर्तियां पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि कामधेनु विश्वविद्यालय किसानों और पशुपालकों के भविष्य का केंद्र है, वहां भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। राजभवन के इस आदेश से दोषियों पर कार्रवाई होगी और विश्वविद्यालय में पारदर्शिता आएगी।

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