जनजातीय अंचलों की बेटियों को अंग्रेजी में दक्ष बनाने 90 दिवसीय विशेष पाठ्यक्रम, बिलासपुर में शिक्षक प्रशिक्षण संपन्न

उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में जनजातीय अंचलों की महाविद्यालयीन छात्राओं में अंग्रेजी भाषा के संप्रेषण कौशल को विकसित करने के उद्देश्य से बिलासपुर में एक महत्वपूर्ण संभाग स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बिलासपुर में 15 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों की बेटियों को अंग्रेजी में दक्ष बनाना और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना था, ताकि वे उच्च शिक्षा, रोजगार और व्यक्तित्व विकास के व्यापक अवसर प्राप्त कर सकें।
इस विशेष कार्यक्रम में उच्च शिक्षा आयुक्त रीता यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यशाला में बिलासपुर संभाग के विभिन्न महाविद्यालयों से कुल 89 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें 25 प्राचार्य, 47 प्राध्यापक और 17 अन्य प्रतिभागी शामिल थे। यह पहल उच्च शिक्षा में गुणवत्ता संवर्द्धन और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम का शुभारंभ शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं बिलासपुर संभाग के अपर संचालक द्वारा किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। अपने उद्बोधन में उन्होंने इस कार्यशाला को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता बढ़ाने और सभी वर्गों के लिए समान विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। इसके पश्चात, संप्रेषणात्मक अंग्रेजी प्रशिक्षण के राज्य स्तरीय सदस्य और बिलासपुर संभाग के नोडल अधिकारी ने प्रशिक्षण की कार्ययोजना और उसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
आयुक्त रीता यादव ने अपने प्रेरक उद्बोधन में छात्रहित को सर्वोपरि रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों में छात्राओं की शैक्षणिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आवश्यकता पड़ने पर रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी गतिविधियों के लिए नियमानुसार प्रतिपूरक अवकाश की सुविधा भी शिक्षकों को प्रदान की जाएगी।
रीता यादव ने विशेष रूप से जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों में अंग्रेजी भाषा के प्रति आत्मविश्वास विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उनका मानना था कि अंग्रेजी भाषा में दक्षता प्राप्त करने से इन विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, रोजगार के अवसर और व्यक्तित्व विकास के मार्ग और अधिक प्रशस्त होंगे, जिससे वे भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
कार्यशाला के दौरान, डॉ. एम. एस. गुप्ता ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि छात्राओं के अंग्रेजी संप्रेषण कौशल को निखारने के लिए 90 दिवसीय एक विशेष पाठ्यक्रम की अनुशंसा की गई है। इस पाठ्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य उन्हें व्यावहारिक अंग्रेजी में कुशल बनाना है।
स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सोमाली गुप्ता ने इस 90 दिवसीय विशेष पाठ्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने पाठ्यक्रम के शिक्षण पद्धति, विभिन्न मॉड्यूल और उन्हें तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। यह पाठ्यक्रम जनजातीय छात्राओं को अंग्रेजी भाषा में प्रभावी ढंग से संवाद करने में सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे उनका शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य उज्ज्वल हो सके।





