जशपुर में ढुकू प्रथा के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान की तैयारी, समर्पित संस्था गांव-गांव तक पहुंचेगी
जशपुर जिले में ढुकू प्रथा को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही शहर से लेकर गांव तक स्वयंसेवी संगठन समर्पित के स्वयंसेवक जागरूकता अभियान में जुटेंगे। संस्था की अंजली ताम्रकार ने बताया कि संस्था ने बाल विवाह के विरुद्ध 100 दिन का महा अभियान चलाया था। इस दौरान एक सप्ताह तक जागरूकता रथ का संचालन भी किया गया था। इस रथ को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने झंडी दिखाकर रवाना किया था।
इस अभियान के दौरान बाल विवाह मुक्त जशपुर का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए संस्था ने शहर से लेकर गांव तक जागरूकता और संपर्क अभियान चलाया था। इस दौरान 300 से अधिक ऐसे परिवारों से संपर्क हुआ, जो ढुकू प्रथा (लीव इन) से प्रभावित थे। इससे सबसे अधिक किशोर-किशोरियां प्रभावित हो रही हैं। अंजली ताम्रकार ने बताया कि विवाह की उम्र से पहले ही प्रेम संबंध में आकर किशोर-किशोरियां साथ में रहने लगते हैं। जिससे किशोरियां गर्भवती हो जाती हैं। इससे प्रसव के दौरान जच्चा और बच्चा दोनों के जीवन को खतरा होता है। समय के साथ यह समस्या लगातार गंभीर रूप धारण करती जा रही है।
अंजली ताम्रकार ने बताया कि लीव इन (ढुकू) प्रथा को लेकर समर्पित संस्था जल्द ही जिले में व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान शुरू करेगी। उन्होंने बताया कि अभियान की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसके लिए जिले के अधिकारियों से संपर्क किया गया है। संस्था का मानना है कि ढुकू प्रथा अब बाल विवाह से भी अधिक गंभीर समस्या बन गई है। इससे किशोर वर्ग का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
बिना ब्याह किए साथ रहने के दौरान किसी तरह का विवाद होने पर मामला थाना के दहलीज तक पहुंच जाता है। किशोर के साथ उसके पूरे परिवार को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। आपराधिक प्रकरण बनने की स्थिति में पूरा कैरियर प्रभावित होने की आशंका बन जाती है। इसे रोकने के लिए जागरूकता ही एक मात्र उपाय है।
समर्पित संस्था के अनुसार 300 परिवारों से हुए प्रारंभिक संपर्क के दौरान ढुकू प्रथा के पीछे नशा और सामाजिक व पारिवारिक दायित्व को लेकर जागरूकता की कमी प्रमुख कारण सामने आया है। नशे में डूबे रहने वाले परिवार अक्सर अपने स्वजनों के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। इससे किशोर कब घर से जा रहे हैं और कब आ रहे हैं, इस पर परिवार के वरिष्ठजन ध्यान नहीं देते। इससे किशोरों के भटकने का अवसर बढ़ जाता है।
आदिवासी बाहुल्य जशपुर जिले में बाल श्रम भी एक गंभीर समस्या है। समर्पित संस्था के आंकड़े के अनुसार बीते एक साल के दौरान प्रदेश में 78 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 60 मामले जशपुर जिले के हैं। कानून के अनुसार 14 साल से कम उम्र के बच्चे से किसी भी तरह का श्रम कराना कानूनन अपराध है। वहीं 16 साल या इससे अधिक उम्र के बच्चे बिना जोखिम वाले काम कर सकते हैं।
कोतवाली थाना क्षेत्र के एक गांव में 15 साल की किशोरी का गांव के ही एक युवक से प्रेम संबंध हुआ। इसके बाद वे लीव इन में साथ रहने लगे। किशोरी गर्भवती हो गई और प्रसव के दौरान उसकी मौत हो गई। बच्चे को परिवार ने अपनाने से इंकार कर दिया। नवजात को दत्तक गृह में संरक्षित किया गया है।
सन्ना थाना क्षेत्र में एक 17 साल की किशोरी का एक युवक से प्रेम संबंध होने के बाद लीव इन में रहने के दौरान किशोरी का गर्भावस्था में ही मौत हो गई। घटना से डर कर युवक फरार हो गया।




