.
ग्राम तमोरा (सुर्रा) में आयोजित शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन कथा वाचक पंडित आकाश कृष्ण शास्त्री ने भक्तिपूर्ण वातावरण में देवर्षि नारद एवं यज्ञदत्त के पुत्र गुणनिधि के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति की शक्ति का सुंदर वर्णन किया। कथावाचक ने बताया कि नारद जी का मुख्य कार्य भगवान का गुणगान करना और भक्ति का प्रचार करना है। वे अपनी वीणा के साथ तीनों लोकों में विचरण करते हुए भगवान के नाम और भक्ति मार्ग का विस्तार करते हैं।
नारद को भगवान के मन का स्वरूप बताते हुए कहा गया कि वे भक्ति के सच्चे मार्गदर्शक हैं। पंडित शास्त्री ने स्कंद पुराण के अनुसार यज्ञदत्त के पुत्र गुणनिधि का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि गुणनिधि अपने नाम के विपरीत अवगुणों से भरा हुआ था। बुरी संगत में पड़कर वह चोर बन गया, जिसके कारण उसे पिता ने घर से निकाल दिया। भटकते-भटकते वह अनेक कष्टों से गुजरा, लेकिन अंततः भगवान शिव की कृपा से उसका उद्धार हुआ और उसे सद्गति प्राप्त हुई।
<
