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नक्सलियों के अब तक के सबसे बड़े सरेंडर के साथ ही प्रदेश में नक्सलियों का दायरा सिकुड़ गया है। नक्सली संगठन को चलाने वाला पोलित ब्यूरो भी लगभग खाली हो चुका है, जिसमें एक समय 8 से अधिक सदस्य थे। सेंट्रल कमेटी को मिलाकर ये संख्या 17 से भी ज्यादा थी। अब
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फोर्स के सामने बड़ी चुनौती सुकमा व बीजापुर जिले हैं, जो पश्चिम और दक्षिण बस्तर के क्षेत्र हैं। यहां अब भी पोलित ब्यूरो के सदस्य मिसिर बेसरा, तिरुपति उर्फ देवजी और गणपति के अलावा सेंट्रल कमेटी के सदस्य माडवी हिड़मा, रमन्ना, गणेश उइके जैसे सदस्य सक्रिय हैं।
बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने भास्कर से कहा कि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार फिलहाल पूर्वी और उत्तरी बस्तर में कोई बड़ा नक्सली लीडर सक्रिय नहीं है। अन्य इलाके में देवजी, हिड़मा समेत कुछ गिने-चुने नक्सली ही बचे हैं, जो पुलिस के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। लेकिन वे भी राज्य से बाहर चले गए हैं। हैं। पुलिस आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से जानकारी लेकर गांव-गांव जाकर जांचेगी कि कहीं नया नक्सल लीडर तो नहीं उभर रहा।
अब दूसरे राज्यों से भेजे जा रहे नक्सली
राज्य में नक्सली संगठन कमजोर होने के कारण अब दूसरे राज्यों से नक्सलियों को यहां भेजा जा रहा है। आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, झारखंड और केरल से संगठन से जुड़े लोग छत्तीसगढ़ पहुंच रहे हैं। वहीं नक्सलियों के बड़े लीडर लगातार ऑपरेशन की वजह से हथियार छिपाकर बड़े शहरों में रहने लगे हैं।
झुग्गी-बस्तियों और लेबर क्वार्टर में रहकर वे सरकार के मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं। कई बड़े लीडर राज्य से बाहर चले गए हैं। अब छोटे कैडर सदस्य भी शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक नक्सलियों ने फिलहाल युद्धविराम का निर्णय लिया है। वे छिपकर संगठन को फिर से मजबूत करने की कोशिश में हैं।
आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के बॉर्डर इलाके अब नक्सलियों के नए ठिकाने बन गए हैं। ये इलाके उनके छिपने की सुरक्षित जगहें बन चुके हैं।
रसद रोकने फोर्स ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ी में बनाए 2 कैंप
अब बस्तर के साउथ बस्तर से भी नक्सली आतंक को खत्म करने की रणनीति पर फोर्स ने अमल शुरू कर दिया है। तेलंगाना के नक्सली गुट को इस रीजन से रसद मिल रही है। इसे रोकने के लिए फोर्स ने कर्रेगुट्टा की पहाड़ी के बाद अब पहाड़ के नीचे भी फोर्स का स्थायी कैंप बनाया है।
नक्सलियों के इस रीजन की कमान हिड़मा और चंद्रानन संभाल रहे हैं। खुफिया इनपुट के अनुसार हिड़मा को कुछ दिन पहले ही पोलित ब्यूरो ने सीसी मेंबर बनाकर यहां का इंचार्ज बनाया गया है। हिड़मा और चंद्रानन की टीम में 400 से अधिक नक्सली होने का अंदेशा है।
हालांकि यहां फोर्स की घेरेबंदी के बाद ज्यादातर हार्ड कोर नक्सली और लीडर तेलंगाना के जंगलों में जा छिपे हैं। पता लगा है कि हिड़मा बटालियन का प्रमुख होने के साथ नक्सलियों की बारुद बनाने वाली विंग को भी लीड कर रहा है। फोर्स के पास जो इनपुट है उसके अनुसार नार्थ बस्तर में केवल 15-18 नक्सली ही बचे हैं। अफसरों को मानसून गुजरने का ही इंतजार था। फोर्स ने घने जंगलों में घुसने की प्लानिंग कर ली है।
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