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चारों ओर अग्नि की लपटों में तपकर पद्मासन मुद्रा जैसे आसनों से ये बालिकाएं मजबूत बन रही हैं। ये दृश्य है रायपुर से 125 किमी दूर छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर स्थित गुरुकुल कन्या आश्रम आमसेना का। यहां 10 दिन से बालिकाओं के लिए चल रहे आर्य वीरांगना शिविर का ब
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आखिरी दिन जमीन से 4 फीट ऊंचाई पर बालों की चोटी से लटककर अग्नि के बीच तीन मिनट का पद्मासन कराया गया। यह अभ्यास शारीरिक शक्ति ही नहीं, मानसिक दृढ़ता, अनुशासन और आत्मविश्वास की परीक्षा भी है। शिविर में तलवारबाजी, विभिन्न आसन, लपटों को लांघना आदि सिखाया गया। आश्रम में 10 वर्षों से ये कैंप लग रहा है। अब तक 2000 से ज्यादा बच्चियों को ट्रेनिंग मिल चुकी है।
भास्कर एक्सपर्ट – मुकेश सोनी, प्रांत प्रमुख, भारतीय योग संस्थान
कम उम्र के बच्चे इस तरह के योग करने की कोशिश न करें इस प्रकार की साधना में नियमित अभ्यास, गुरु का मार्गदर्शन और आत्मनियंत्रण की अहम भूमिका होती है। जब मन स्थिर और एकाग्र होता है, तब कठिन से कठिन परिस्थितियां भी आसान लगने लगती हैं। आग के बीच बैठना यह सिखाता है कि भय को समझकर, उस पर काबू पाया जा सकता है।
यही साहस जीवन की हर चुनौती में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। हालांकि यह प्रदर्शन के रूप में लिया जा सकता है, जिसमें योग करने वाला व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से सक्षम हो। कम उम्र के बच्चे यह करने की कोशिश न करें।
हठयोग की तरह है चोटी से लटककर पद्मासन, बेहद कठिन
पद्मासन हठयोग की तरह है। केश के सहारे हवा में आसन करते हुए भारती खतवासे (मध्य प्रदेश), मेधा (असम), अमृता कर्मी बोध (ओडिशा) और खुशबू लकरा (ओडिशा) का यह चित्र हठ योग साधना को दर्शाता है, जहां शरीर और मन पर पूर्ण नियंत्रण के साथ कठिन परिस्थितियों में भी संतुलन बनाए रखा जाता है।
यह दृश्य संदेश देता है कि सही दिशा में किया गया अभ्यास बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। साहस केवल जोखिम उठाने का नाम नहीं, बल्कि सही समय पर संयम और विवेक से निर्णय लेने की क्षमता है। हठ का अर्थ दृढ़ संकल्प है। शिविर में भाग लेने वाली आधी आश्रम में पढ़ने वाली और आधी बाहर की बच्चियां हैं।
- कौन आ सकता है, एक्सपर्ट कौन: शिविर में कश्मीर में कमांडो ट्रेनिंग देने वाले एक्सपर्ट दिलीप कुमार जैसे लोग शामिल रहे हैं। इसमें कहीं की भी बच्चियां आ सकतीं हैं,पर उन्हें योग की सामान्य जानकारी हो।
- सावधानियां: बच्चियां यह साधना विशेष योग प्रशिक्षक के मार्गदर्शन में करतीं हैं। इसमें पहले बच्चियों की ताकत आंकी जाती है। प्रशिक्षकों के अनुसार यह योग 2 से 5 मिनट तक ही किया जाना चाहिए।
- मकसद: आत्मरक्षा की ट्रेनिंग के अलावा वैदिक ज्ञान, हवन विधि, व्यक्तित्व विकास और नैतिक शिक्षा भी दी जा रही है। मकसद लड़कियों को इतनी मजबूत बनाना है कि जरूरत पर दूसरों की रक्षा कर सकें।
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