सरगुजा जिले में सब्ज़ी किसानों को मिट्टी‑जनित बीमारी विल्ट ने लंबे समय तक परेशान किया। इस बीमारी के कारण पौधे पानी और पोषक तत्वों का अवशोषण नहीं कर पाते और मुरझाकर मर जाते थे। टमाटर, मिर्च, तरबूज और बैंगन जैसी फसलों के पौधे अचानक सूख जाते थे और फसल च
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इलाज महंगा था और कई बार असरदार भी नहीं होता था, इसलिए खेती घाटे का सौदा बनती जा रही थी। इसके बाद ग्राफ्टिंग तकनीक को अपनाकर अंबिकापुर के युवा किसान वितिष गुप्ता ने किसानों को इस संकट से बाहर निकाल दिया। यह ऐसी तकनीक है, जिसमें फसल को एक रोग–रोधी जड़ पर जोड़कर मजबूत पौधा तैयार किया जाता है।

बेंगलुरु से बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद वितिष ने नौकरी की जगह खेती को चुना। उनके दादा भी साल 2005 से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में जुटे थे, उनसे ही प्रेरणा पाकर वितिष ने साल 2022 में करजी फ़ार्म के नाम से ग्राफ्टेड पौधे तैयार करने की शुरुआत की।
शुरुआत छोटी थी, लेकिन लक्ष्य बड़ा। उन्होंने 14 एकड़ में पॉलीहाउस तैयार किया और पहले ही साल में किसानों को ऐसा परिणाम मिला कि आसपास के इलाकों में फिर से खेती की उम्मीद जग गई। वे किसानों को पौधे देने लगे और इस पहल से विल्ट जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे किसानों को न सिर्फ खेती वापस मिली, बल्कि उनकी आय भी कई गुना बढ़ गई।
लुंड्रा, बगीचा और कल्याणपुर जैसे इलाके, जहां मिट्टी की बीमारी ने लगभग 80% खेती को खत्म कर दिया था, वहीं वितिष के ग्राफ्टेड पौधों ने नया जीवन भर दिया। किसानों का उत्पादन दो से तीन गुना बढ़ा, पौधे मजबूत हुए और खेतों में फिर से हरियाली लौट आई। जैसे-जैसे परिणाम दिखे, वैसे-वैसे किसान उनसे जुड़ते गए और देखते ही देखते उनका काम पूरे देश में फैल गया।

आज वितिष अपने 14 एकड़ के पॉलीहाउस से ओडिशा, बंगाल, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड और कर्नाटक जैसे 17 राज्यों के हजारों किसानों को ग्राफ्टेड टमाटर, बैगन और मिर्च के पौधे सप्लाई कर रहे हैं। वे सिर्फ पौधे नहीं देते, बल्कि किसानों के खेतों में जाकर मार्गदर्शन भी करते हैंं। किसानों की समस्याओं का समाधान व्हाट्सएप पर तुरंत करते हैं।
वितिष गुप्ता की अगुआई में ग्राफ्टिंग मॉडल ने सिर्फ खेती बचाई नहीं, बल्कि रोज़गार और आमदनी की नई राह खोली है। उन्होंने अपने काम से 400 से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ा है, जो प्रतिदिन कम‑से‑कम 400 रुपये कमा रही हैं। एक साल में वितिष डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के पौधे सप्लाई कर चुके हैं।

ग्राफ्टिंग में एक पौधे की जड़‑वाले भाग (मूलवृन्त) से जोड़कर, दूसरी पौधे की फल‑वाली या सब्ज़ी किस्म के कलम को लगाया जाता है। जोड़ इस तरह किया जाता है कि दोनों का संवहनी तंतु‑तंत्र एक दूसरे से मिल जाएं, जिससे नया पौधा दोनों हिस्सों का लाभ लेकर विकसित हो। इस विधि से तैयार पौधा मिट्टी‑जनित रोग, कीट या खराब मिट्टी-मौसम जैसी चुनौतियों से बेहतर लड़ पाता है।
इन प्रगतिशील किसान से और जानें… 8319620998
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