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नगर निगम का वाटर सप्लाई सिस्टम आज भी 74 साल पहले के पैटर्न पर चल रहा है। फिल्टर प्लांट से आने वाला पानी मेन राइजिंग लाइन से निगम की टंकियों में पहुंचता है। टंकियों से डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों के जरिए घरों तक पानी पहुंचता है। पानी की दिशा मोड़ने और अलग-अ
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शहर की 43 टंकियों में भी एक-एक वाल्व है। यह वाल्व टंकी और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों को जोड़ता है। लाइन मैन इन वाल्व की चूड़ी खोलने और बंद करने का काम करते हैं। कई बार ऐसा होता है कि टंकी भरने के समय लाइनमैन चूड़ी बंद करना भूल जाते हैं और पूरा पानी बह जाता है।
फिर लोगों को पानी ही नहीं मिल पाता। इन सबके बावजूद अब तक वाटर सप्लाई लाइन को ऑनलाइन करने की दिशा में निगम कोई पहल नहीं कर पाई है। नगर निगम के जल विभाग के ईई नरसिंग फरेंद्र ने बताया कि शहर में मेन राइजिंग लाइन में इस तरह करीब 150 वाल्व हैं। इन वाल्व में बनी चूड़ी को घुमाया जाता है।
किस टंकी में कितना पानी पहुंचाना है, यह वाल्व की चूड़ी से तय होता है। कम पानी पहुंचाना है तो चूड़ी को कम खोला जाता है। ज्यादा पानी पहुंचाने के लिए उसे पूरा खोल दिया जाता है। मेन राइजिंग लाइन के बाद टंकियों की वितरण लाइनों में भी इस तरह के वाल्व होते हैं।
फैक्ट फाइल
- 150 वाल्व हैं शहर में मेन राइजिंग लाइन में
- 30 कर्मचारी रोज सुबह खोलते हैं वाल्व
- 43 ओवरहेड टैंक हैं शहर में
- 25 लाख लोगों के घरों में पहुंचता है पानी
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