कुनकुरी के कन्डोरा पंचायत में सोमवार को हुआ उपचुनाव लगातार 26वीं बार भी असफल रहा। सोमवार को 1408 मतदाता वाले कन्डोरा पंचायत के 7 पंच पद के लिए उपचुनाव हुआ। इस बार भी इन 7 वार्ड में पंच के लिए उम्मीदवार नहीं मिले। इसके साथ ही चुनाव 27वीं बार उपचुनाव क
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पंचायत की 17 पंच की सीट में 7 सीट अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित है, लेकिन इन वार्डों में एक भी अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है। ऐसे में साल दर साल उपचुनाव कराने की नौबत आ रही है। दरअसल, जशपुर जिला पेसा अधिनियम के तहत अनुसूची-5 में आता है। इसके तहत सभी पंचायत में 50 फीसदी आरक्षण अनिवार्य है। सन 2000 में परिसीमन के बाद यहां पहली बार चुनाव हुए।
इसमें अनुसूचित जनजाति की कुंती बाई सरपंच का चुनाव जीतीं। वह 2010 के चुनाव में भी सरपंच चुनी गईं। इसके अलावा गांव में आकर बसे दूसरे परिवार के रामदीन 2005 और 2015 में सरपंच चुने गए। 2020 धनमति बेसरा चुनाव जीतीं।
वहीं 2025 में हुए पंचायत चुनाव में गांव की पहली सरपंच कुंती बाई की रिश्तेदार वर्तमान में भगवती राय सरपंच हैं। गांव में कोई और अनुसूचित जनजाति परिवार नहीं होने के कारण वार्ड पंच पर कोई उम्मीदवार ही नहीं मिलता है। 2000 के चुनाव के बाद से लगातार प्रशासन यहां उपचुनाव की तैयारी कर अधिसूचना जारी करता है। हर साल उपचुनाव की पूरी तैयारी होती है, लेकिन गांव में उम्मीदवार नहीं मिलता और 7 वार्ड में कोई पंच नहीं बनता है।
अब एसटी के चार परिवार, उनकी भी चुनाव में दिलचस्पी नहीं गांव के रंजीत सिंह बताते है कि वर्तमान में उनके गांव में चार अनुसूचित जनजाति परिवार हैं, जिनमें 22 सदस्य हैं। इनमें दो परिवार हिंदू और दो परिवार ईसाई हैं। हिंदू परिवार से दो महिलाएं सरपंच बन चुकीं हैं। वहीं ईसाई परिवार के अधिकांश सदस्य पढ़े-लिखे और अच्छे सरकारी पदों पर होने के कारण चुनाव में दिलचस्पी नहीं लेते हैं।
सरपंच के लिए झारखंड से बुलाकर महिला को लड़वाया चुनाव ग्रामीणों के अनुसार 2000 में परिसीमन हुआ, तो गांव में कोई अनुसूचित जनजाति परिवार नहीं था। एक परिवार में अनुसूचित जनजाति वर्ग की कुंती बाई विवाह करके आई थी। वह भी पति के मृत्यु के बाद झारखंड के सिमडेगा जिले में अपने मायके लौट चुकी थी।
ऐसे में गांव में 30 लोगों का प्रतिनिधिमंडल झारखंड में महिला के मायके पहुंचा और मान-मनौव्वल कर गांव लेकर आया। ग्रामीणों के इस भरोसे के बाद वह सरपंच के पद पर निर्विरोध खड़ी होने को तैयार हो गई कि पंचायत के काम में पूरा गांव उसकी मदद करेगा। इसके बाद कुंती बाई दो बार सरपंच बनीं।

कन्डोरा गांव में 17 में से 7 पंच उम्मीदवार सालों से नहीं मिल रहे। इस संबंध में जानकारी सामने आई है। वरिष्ठ अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया जाएगा। इस संबंध में सलाह लेकर प्रक्रिया बढ़ाई जाएगी। -प्रमोद सिंह, सीईओ, जनपद पंचायत कुनकुरी
एक्सपर्ट व्यू – महादेव कावरे, पूर्व कमिश्नर
शासन को भेजनी होगी रिपोर्ट, इससे दोबारा परिसीमन कराया जा सकेगा पंचायतों में जनसंख्या के आधार पर ही सीटों का निर्धारण किया जाता है। कन्डोरा में जिस तरह प्रत्याशी नहीं मिलने की स्थिति लंबे समय से बन रही है, ऐसे मामलों में जिला प्रशासन को विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर संचालक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को भेजना चाहिए।
प्रस्ताव में संबंधित पंचायतों की वर्तमान जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति व प्रतिनिधित्व संबंधी समस्याओं का उल्लेख आवश्यक है। इसके आधार पर शासन स्तर पर सीटों का फिर से परिसीमन कर वार्डों और पदों का युक्तिसंगत निर्धारण किया जा सकता है।
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