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प्रदेश के सभी सरकारी दफ्तरों में जनवरी महीने से प्रीपेड स्मार्ट मीटर की व्यवस्था लागू हो जाएगी। यानी मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज करना होगा। उपयोग के हिसाब से जैसे ही राशि खत्म होने वाली होगी, उसे पहले अलर्ट मैसेज आएगा, ताकि पहले से रिचार्ज कर लें।
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दरअसल, प्रदेशभर में 55.63 लाख से ज्यादा सरकारी दफ्तरों के नाम पर बिजली कनेक्शन हैं। इन पर करीब 5000 करोड़ रुपए बिल बकाया है। समय पर बिल जमा नहीं करने के कारण हर महीने 60 करोड़ रुपए सरचार्ज जुड़ रहा है।
यही वजह है कि पहले चरण में सरकारी दफ्तरों से प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत की जा रही है। सभी दफ्तरों में यह व्यवस्था लागू हो जाने के बाद घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शनों में भी प्रीपेड मीटर अनिवार्य किया जाएगा। बता दें कि बिजली बिल बकाया होने के कारण बिजली कंपनियों पर बोझ बढ़ता है।
घरेलू या व्यावसायिक बकाएदारों पर तो वसूली या कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाती है, लेकिन सरकारी अस्पताल, नगरीय निकायों और पंचायतों में पेयजल सप्लाई, स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं सीधे लोगों से जुड़ी होती है, इसलिए कनेक्शन नहीं काटे जाते। सिर्फ नोटिस थमा दिया जाता है। इस दौरान सरकारी विभागों या एजेंसियों पर सरचार्ज का बोझ भी बढ़ता जाता है।
50 फीसदी से ज्यादा दफ्तरों में प्रीपेड मीटर लगाए गए आरडीएसएस योजना के अधीक्षण यंत्री व स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था के नोडल अधिकारी एम. जामुलकर के मुताबिक प्रदेश में कल 55 लाख 63 हजार 405 कनेक्शन हैं। इनमें प्री पेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।
वर्तमान में लगभग 30 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इस महीने तक बाकी दफ्तरों में भी स्मार्ट मीटर लगा लिए जाएंगे। जनवरी महीने से इन सभी को प्रीपेड कनेक्शन के रूप में लागू किया जाएगा। मोबाइल या अन्य प्रीपेड सुविधाओं की तरह इसमें भी प्लान होगा। इस पर चर्चा चल रही है।
नई व्यवस्था
- मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज, खत्म होने पर मैसेज आएगा।
- व्यावसायिक और घरेलू कनेक्शनों में भी जल्द अनिवार्य होगा।
विभागों को बिजली के लिए करना होगा बजट प्लान बिजली कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी दफ्तरों पर बड़ी राशि बकाया होने के बावजूद कार्रवाई नहीं कर सकते थे, क्योंकि जनहित की कई योजनाएं या व्यवस्थाएं रुक जातीं। विभागों को बार-बार नोटिस जारी किया जाता है। इस बीच सरचार्ज भी बढ़ता है, जो संबंधित विभाग के लिए बड़ा बोझ होता है। यह राशि पटाने के लिए वित्तीय मंजूरी के लिए फाइलें चलती हैं, जिससे बेवजह की देरी होती है। प्रीपेड सुविधा होने से ये दिक्कतें नहीं होंगी। अब विभागों को पहले से ही बजट प्लान करना पड़ेगा।
टॉप 10 बकायेदार विभाग: नगरीय निकाय, पंचायत, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, पुलिस, वन, जल संसाधन, बिजली, उद्योग।
विभागों पर जो बकाया राशि है, उसकी भी वसूली होगी घरेलू, व्यावसायिक व सरकारी सभी तरह के कनेक्शनों में स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। प्री पेड व्यवस्था सरकारी दफ्तरों से शुरू की जाएगी। जनवरी से इसे शुरू करने की योजना है। प्रीपेड प्लान पर भी चर्चा चल रही है। विभागों पर जो बकाया राशि है, उसकी भी वसूली होगी। -एम. जामुलकर, नोडल अधिकारी स्मार्ट मीटर
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