रायपुर21 मिनट पहलेलेखक: कौशल स्वर्णबेर
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छत्तीसगढ़ में कचरा प्रबंधन को लेकर अब सिर्फ निर्देश नहीं, बल्कि सख्त कार्रवाई शुरू होने वाली है। प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है।
एक अप्रैल से निकायों में लागू इस नियम पर अब कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत अब नियमों की अनदेखी करने वाले नगरीय निकायों, संस्थानों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सीधे आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएंगे।
यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना के अनुपालन में उठाया गया है, जिससे साफ संकेत है कि अब कचरा प्रबंधन में ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी। इसके तहत अब जवाबदेही सिर्फ संस्थानों की नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्तर तक तय होगी।
चार हिस्सों में कचरा अलग करना अनिवार्य राज्य के सभी शहरों में अब कचरे को चार श्रेणियों—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट—में अलग-अलग करना होगा। नगर निगमों और नगरपालिकाओं को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कचरा ढोने वाले हर वाहन में इन चारों श्रेणियों के लिए अलग-अलग कम्पार्टमेंट हों। यह प्रावधान सीधे तौर पर स्रोत स्तर पर सेग्रीगेशन लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
बड़े कचरा उत्पादकों पर सबसे ज्यादा सख्ती होटल, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, बाजार और बड़ी हाउसिंग सोसायटी जैसे ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ अब शासन के रडार पर हैं। सभी को ऑनलाइन पंजीयन कराना होगा। परिसर में ही गीले कचरे का निपटान करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर ‘Extended Bulk Waste Generator Responsibility’ के तहत प्रमाणपत्र लेना होगा। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर भारी पर्यावरण प्रतिकर (जुर्माना) लगाया जाएगा।
सीएस को भेजेंगे रिपोर्ट पुराने कचरे पर फोकस अब जिला कलेक्टर सीधे इस व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेंगे। सभी नगरीय निकायों में कचरा प्रबंधन संसाधनों का ऑडिट होगा। रिपोर्ट मुख्य सचिव कार्यालय को भेजी जाएगी।पुराने डंपिंग साइट्स के कचरे के निपटान (बायो-रिमेडिएशन) के लिए समयबद्ध एक्शन प्लान बनाना होगा। साथ ही हर निकाय में मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) का संचालन और उसका पंजीयन भी अनिवार्य कर दिया गया है।
3 स्तर पर कार्रवाई: जुर्माने या जेल
नई व्यवस्था में दंड को तीन स्तरों में बांटा गया है:-
- पहला स्तर: नियम तोड़ने पर तत्काल जुर्माना।
- दूसरा स्तर: लगातार लापरवाही पर आपराधिक केस।
- तीसरा स्तर: जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर भी अभियोजन।
जनभागीदारी और टेक्नोलॉजी पर जोर सरकार ने साफ किया है कि सिर्फ दंड से नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सिस्टम टिकाऊ बनेगा। होम कम्पोस्टिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। जनप्रतिनिधियों और स्कूलों के जरिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। ‘निदान 1100’ और व्हाट्सएप चैटबॉट के जरिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी जाएगी।

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