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आखिरकार जिला न्यायालय में पदस्थ क्लर्क संगीता निषाद की जिद की जीत हो गई। वह एक साल तक आर्थिक तंगी के बीच न्याय के लिए जंग लड़ती रही। जिसके बाद दोबारा क्लर्क की कुर्सी हासिल करने में सफलता पाई। दरअसल जिला न्यायालय में पदस्थ संगीता निषाद सपनों की उड़ान भरने के बाद फर्जीवाड़े के जाल में फंस गईं।
सितंबर 2022 से बालोद कोर्ट में क्लर्क के रूप में ड्यूटी निभा रही संगीता को सितंबर 2024 में दंतेवाड़ा के कुटुम्ब न्यायालय में उच्च पद स्टेनोग्राफर की नियुक्ति का बड़ा मौका मिला। नियुक्ति पत्र हाथ में आते ही उन्होंने बालोद कोर्ट में एक माह का वेतन जमा कर त्यागपत्र थमा दिया। उसी दिन इस्तीफा स्वीकार हो गया।
बालोद कोर्ट से कार्यमुक्ति मिली फिर अगले दिन बस से वह दंतेवाड़ा के लिए रवाना हो गईं ताकि नई नौकरी ज्वाइन कर सकें लेकिन वहां पहुंचते ही झटका लग गया। दरअसल कोर्ट के प्रशासनिक अधिकारी ने संगीता को बताया कि पद तो निरस्त हो चुका है। परीक्षा में अनियमितता और आपराधिक साजिश की वजह से पूरी भर्ती रद्द करने की नौबत आ गई है। यह सुनकर संगीता स्तब्ध रह गईं क्योंकि पहले नौकरी से इस्तीफा दे चुकी थी। नई नौकरी के लिए रास्ते बंद हो गए थे।
बालोद लौटकर न्याय की गुहार दंतेवाड़ा में नौकरी नहीं मिलने के बाद संगीता अगले दिन बालोद लौटीं। जिसके बाद पूर्व पद पर लौटने की गुहार लगाई लेकिन नियमों की दीवार बाधा बन गई। दरअसल इस्तीफा स्वीकार हो चुका था। ऐसे में दोबारा से पहले मिले पद को हासिल करने संगीता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका लगाई लेकिन वहां से निराशा मिली क्योंकि नियमानुसार सब हुआ था। संगीता ने हार नहीं मानी। जिसके बाद जिला कर्मचारी संघ से समर्थन लेकर कई बाद उच्च अफसरों से निवेदन किया, धरना दिया।
छूट देकर हाई कोर्ट ने अर्जी स्वीकारी मुख्य न्यायाधीश को इस मामले की जानकारी होने के बाद संवेदनशीलता दिखाते हुए अपने स्तर पर विभागीय प्रक्रिया शुरु किया। हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ जिला न्यायपालिका स्थापना (भर्ती एवं सेवा शर्तें) कर्मचारी नियम 2023 के नियम 45 में विशेष छूट देकर संगीता का आवेदन स्वीकार किया। क्लर्क पद पर पुनः बहाली का आदेश दिया। इस्तीफे से बहाली तक ”नो वर्क नो पे” का नियम लगा लेकिन न्याय की जीत हासिल करने में संगीता सफल रही। एक साल बाद न्याय मिला।संघर्ष से टूटे सपने भी जुड़ सकते हैं।
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