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छत्तीसगढ़ में किसानों और मजदूरों की लगातार अनदेखी और बढ़ते बिजली बिल जैसे मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने बड़ा ऐलान किया है। राजधानी रायपुर में आज किसान संगठनों की बैठक हुई, जिसमें प्रदर्शन की रुपरेखा तैयार की गई।
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बैठक में पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) से तेजराम विद्रोही, प्रवीन क्रांति, छत्तीसगढ़ किसान महासभा से नरोत्तम शर्मा, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से आलोक शुक्ला, क्रांतिकारी किसान यूनियन से रमाकांत बंजारे, मजदूर कार्यकर्ता समिति से कल्याण पटेल समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
बैठक में कहा गया कि हसदेव, तमनार और बस्तर जैसे इलाकों में आदिवासियों की जमीन और जंगलों को छीनकर खनन परियोजनाओं को सौंपा जा रहा है। इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों का जीवन भी संकट में आ गया है। किसान नेताओं ने बढ़ती महंगाई, बिजली बिल, फसल बीमा, धान की MSP और प्लेसमेंट एजेंसी से कर्मचारियों की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।
प्रदर्शन की रुपरेखा
6 से 10 नवंबर के बीच संयुक्त किसान मोर्चा का प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। इस दौरान मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा जाएगा। 7 से 10 दिसंबर के बीच रायपुर में राज्यस्तरीय जन कन्वेंशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेता भी शामिल होंगे।
आने वाले धान खरीदी सीजन में किसान मोर्चा सरकार की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेगा, ताकि किसानों के साथ धोखा न हो। मोर्चे के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समन्वय समिति (तेजराम विद्रोही, जनकलाल ठाकुर, आलोक शुक्ला) गठित की गई। 26 नवंबर को प्रदेशभर में रैलियां और प्रदर्शन होंगे।
किसान नेता तेजराम विद्रोही ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ किसानों की नहीं, पूरे प्रदेश के भविष्य की है। अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
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