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अटल जी की 101 वीं जयंती के अवसर पर उनके व्यक्तित्व के काव्य पक्ष पर केन्द्रित वनमाली सृजन केन्द्र, पाठक मंच व लायंस क्लब की एक संयुक्त संगोष्ठी हुई। यह कार्यक्रम कवर्धा के सर्किट हाउस के अशोक हॉल में आयोजित की गई।
वनमाली केन्द्र के अध्यक्ष नीरज मनजीत, साहित्यकार व पुरातत्त्व विशेषज्ञ आदित्य श्रीवास्तव तथा पीजी कॉलेज में हिंदी के सहायक प्राध्यापक नरेन्द्र कुमार कुलमित्र ने अटल जी की कविताओं का विश्लेषण करते हुए आलेख पढ़े। ख्यात कवि उपन्यासकार स्व. विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।
नीरज मनजीत ने भूमिका में कहा कि अटल जी के विराट राजनीतिक व्यक्तित्व की छाया में उनका कवि व्यक्तित्व अलक्षित रह जाता है, अतः उनके काव्य पक्ष को चर्चा में लाने का हमने छोटा सा प्रयास किया है। नीरज ने अपने आलेख में कहा कि अटल जी की कविताओं में आशा-निराशा, जय-पराजय, संघर्ष, मानवीय संवेदनाओं और उच्चतम जीवन मूल्यों की बहुत ही सुंदर अभिव्यक्ति देखी जा सकती है। वे प्रांजल-समृद्ध, संस्कृतनिष्ठ, सुरुचिपूर्ण हिंदी में कविताएं रचते हैं। वे राष्ट्रप्रेम से भरे मानवीयता के पक्षधर कवि हैं, जिनकी भाषा, शैली और अभिव्यक्ति में भारतीय संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक दार्शनिक दृष्टि झलकती है।
आदित्य श्रीवास्तव ने आलेख में कहा कि अटल जी की कविताएं केवल साहित्यिक रचनाएं नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन, राष्ट्र चेतना और मानवीय मूल्यों का घोषणा पत्र हैं। उनकी कविता बताती है कि शक्ति के साथ संवेदना और नेतृत्व के साथ विनम्रता संभव है। उनकी कविताएं युवाओं को संघर्ष का साहस, समाज को दिशा और राष्ट्र को आत्मबल प्रदान करती हैं। कुलमित्र ने अपने विश्लेषण में कहा कि उनकी कविताओं में यथार्थ, कर्तव्यबोध, राष्ट्रीयता, जिजीविषा और मानवीय करुणा का अद्भुत समन्वय है। उनकी भाषा सरल, संप्रेषणीय है।
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