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- Employees Will Only Visit Your Home After May 1st. Avoid Cyber Fraud; Do Not Share Bank Account, ATM Card, Or Financial Transaction Information.
रायपुर10 घंटे पहलेलेखक: असगर खान
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ऑनलाइन जनगणना शुरू हो चुकी है। जनगणना में अभी लोग ऑनलाइन जानकारी भर सकते हैं। कर्मचारियों के घर आकर जानकारी लेने का सिलसिला 1 मई से शुरू होगा। इसलिए अभी कोई भी कर्मचारी घर आकर कोई जानकारी मांगता है तो वो फर्जी है।
यही नहीं जनगणना के दौरान लोगों को अपनी वित्तीय लेन-देन संबंधी जानकारी नहीं देनी है। अधिकारी-कर्मचारियों को इस तरह की जानकारी मांगने का अधिकार भी नहीं है। जनगणना के लिए आए कर्मचारी किसी भी व्यक्ति से उनकी फाइनेंशियल, बैंकिंग और पर्सनल डिटेल्स नहीं मांग सकते।लोग इस तरह की किसी भी जानकारी देने के लिए बाध्य भी नहीं है।
न ही यह अनिवार्य है। जनगणना कर्मचारी आम लोगों से उनका आधार नंबर, पैन कार्ड नंबर, मंथली या सालाना इनकम, बैंक बैलेंस, प्रॉपर्टी की कीमत, बैंक खाता नंबर, पासबुक, डेबिट-एटीएम कार्ड या उसका नंबर, कहां-कितना निवेश किया है, कितना कैश या ज्वेलरी है, मोबाइल नंबर, ई-मेल या उसके पासवर्ड की जानकारी नहीं मांग सकता है।
कोई भी कर्मचारी इस तरह की जानकारी मांगता है तो उसकी सूचना स्थानीय पुलिस के साथ ही हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दी जा सकती है।
जनगणना में सही और सटीक जानकारी दें, नहीं तो लगेगा एक हजार का जुर्माना केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जनगणना-2027 को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें आम लोगों और जनगणना ड्यूटी में लगे कर्मचारियों दोनों के लिए गाइडलाइन बनाई गई है। गाइडलाइन में इस बात पर सख्ती से जोर दिया गया है कि जनगणना के दौरान दी गई निजी जानकारियां हर हाल में गोपनीय रहेंगी।
इसे किसी भी सिविल या क्रिमिनल कोर्ट में साक्ष्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा प्रगणक और पर्यवेक्षकों को पहचान और नियुक्ति पत्र साथ लेकर जाना अनिवार्य होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर 1000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। जरूरत पड़ी तो कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
सांस्कृतिक परंपराओं में मिलेगी छूट जनगणना के दौरान जानकारी देने में कुछ छूट भी दी गई है। लेकिन यह छूट केवल सांस्कृतिक परंपराओं के चलते ही दी जाएगी। उदाहरण के तौर पर किसी परिवार की परंपरा में महिला सदस्य या पति का नाम लेना वर्जित है तो उन्हें नाम बताने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। जिस तरीके से वे बता सकते हैं उन्हें छूट दी जाएगी। जानकारी देने के लिए दबाव नहीं बनाया जाएगा।
ये सावधानी तो जरूर बरतें… कर्मचारियों को बैंक डिटेल न दें। बैंक अकाउंट, यूपीआई पिन और ओटीपी कभी न बताएं। मोबाइल पर संदिग्ध लिंक/एप से बचें। वाट्सएप-एसएमएस पर अंजान लिंक पर क्लिक न करें। घर आने वाले कर्मचारी के पहचान की पुष्टि करें। कर्मचारी का आईडी कार्ड जरूर चेक करें। जनगणना पूरी तरह से निशुल्क है। कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इसके लिए पैसे नहीं मांग सकता। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या किसी कर्मचारी पर शक हो तो इसकी सूचना पुलिस या 1930 पर दें।
स्केमर की पहचान ऐसे करें फर्जी जनगणनाकर्मी हमेशा आईडी दिखाने से बचेगा या बहाने बनाएगा। कैश, ओटीपी या बैंक डिटेल्स मांगेगा। जल्दबाजी करेगा, दबाव बनाएगा। सरकारी एप की जगह कागज/डायरी या अंजान एप पर डिटेल दर्ज करेगा। मोबाइल पर संदिग्ध लिंक या क्यूआर कोड जल्दी स्कैन करने को कहेगा। अजीबोगरीब या गैर-जरूरी सवाल (जैसे बैंक बैलेंस, पासवर्ड) पूछेगा। केंद्र का अलर्ट, हेल्पलाइन नंबर भी जारी केंद्र सरकार ने इस तरह का फर्जीवाड़ा रोकने को लेकर अलर्ट जारी किया है। केंद्र की ओर से हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया गया है। केंद्र के पास ऐसी शिकायतें पहुंची थी कि ऑनलाइन फर्जीवाड़ा करने वाले जनगणना के नाम पर लोगों की वित्तीय जानकारी मांग रहे हैं। लोगों को मोबाइल और वाट्सएप पर एपीके फाइल भेजकर क्लिक करने के लिए कहा जा रहा है। ताकि उनके खाते में जमा रकम उड़ाई जा सके।

जनगणना कर्मचारी 1 मई से ही घरों में पहुंचेंगे। वे वित्तीय लेन-देन संबंधित कोई सवाल नहीं करेंगे। न ही लोगों को इस तरह की जानकारी देना है। फर्जीवाड़ा करने वालों से अलर्ट रहें। परिवार से जुड़ी गलत जानकारी न दें, इस पर जुर्माना लगेगा। -प्रदीप साव, अतिरिक्त संचालक जनगणना निदेशालय

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