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दुर्ग में लगातार बारिश से बाढ़ जैसे हालात, एसडीआरएफ ने 7 माह की बच्ची समेत तीन को बचाया; 160 लोग सुरक्षित निकाले गए

दुर्ग जिले में पिछले तीन दिनों से लगातार बारिश हो रही है। इससे जनजीवन की रफ्तार धीमी हो गई है। 25 सितंबर की सुबह तक दुर्ग में 24 घंटे के दौरान 49.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसी बीच रानीतराई थाना क्षेत्र के ग्राम केसरा में खारुन नदी का पानी अचानक बढ़ गया। नदी के तटीय इलाके में पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात बन गए। इसी दौरान एक परिवार पानी के बीच फंस गया। परिवार में 7 माह की दुधमुंही बच्ची, उसकी मां और बुजुर्ग महिला तेज बहाव के बीच घिर गईं। पानी लगातार बढ़ता देख परिवार के लोगों ने मदद की सूचना दी।

जानकारी मिलते ही नगर सेना की एसडीआरएफ टीम मोटर बोट और जरूरी बचाव सामान के साथ मौके पर पहुंची। मोटर बोट से पहुंची बचाव टीम मामला 26 सितंबर का है। ग्राम केसरा में खारुन नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी किनारे बसे इलाके में पानी भर गया। पानी का बहाव तेज होने के कारण 7 माह की बच्ची को लेकर उसकी मां और बुजुर्ग महिला बाहर नहीं निकल पा रही थीं।

सूचना मिलते ही जिला सेनानी और जिला अग्निशमन अधिकारी के निर्देशन में नगर सेना की एसडीआरएफ टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हुई। जवान मोटर बोट, लाइफ जैकेट, पानी में बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले छल्ले और जरूरी सामान लेकर पहुंचे। टीम ने पहले पानी के बहाव और आसपास की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद मोटर बोट को सावधानी से उस जगह तक ले जाया गया, जहां 7 माह की बच्ची, उसकी मां और बुजुर्ग महिला फंसी थीं। जवानों ने बच्ची को सुरक्षित संभाला और उसकी मां, बुजुर्ग महिला को भी बोट में बैठाया। इसके बाद तीनों को बच्ची के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

दुर्ग में लगातार बारिश के बाद नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कई निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में बचाव दल तैनात किए। सबसे ज्यादा असर शिवनाथ नदी के आसपास देखने को मिला। लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण शिवनाथ नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा।

कुम्हारी थाना क्षेत्र के परसदा की जगदीश बाड़ी में पानी भरने के बाद करीब 60 लोगों को बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे। अमलेश्वर थाना क्षेत्र के मटिया खार समेत अन्य इलाकों में भी बचाव अभियान चलाया गया। अलग-अलग स्थानों से करीब 160 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

महमरा एनीकट के ऊपर भी पानी बहने लगा। 25 सितंबर की शाम तक एनीकट के ऊपर करीब चार फीट पानी बह रहा था। इसके चलते महमरा जाने वाला रास्ता बंद करना पड़ा। नदी किनारे बसे गांवों में भी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी गई। बाद में जलस्तर और बढ़ने से नदी के पुराने पुल के ऊपर भी कई फीट पानी बहने की सूचना सामने आई। इसके चलते लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई।

लगातार बारिश का असर दुर्ग शहर में भी देखने को मिला। पुलगांव नाले का पानी शहर की ओर पहुंच गया। पुलगांव पुल के पास आवाजाही प्रभावित हुई। नाले के पास स्थित पेट्रोल पंप में भी पानी भर गया। दुर्ग कोतवाली परिसर में भी पानी भर गया। पानी पुलिसकर्मियों के कमरों तक पहुंच गया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने जरूरी कागज और सामान ऊंची जगह पर रखे।

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