दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रायपुर मंडल ने रेलवे ट्रैक के रखरखाव और सुरक्षा में एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। अब ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) की मॉनिटरिंग और थर्मल इमेजिंग जांच ड्रोन के माध्यम से की जाएगी। इस आधुनिक तकनीक से रेल परिचालन की सुरक्षा, व
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उरकुरा ट्रैक्शन सब स्टेशन में इस मॉडर्न ड्रोन आधारित प्रणाली का शुरुआत की गई है। यह पहल भारतीय रेल में पहली बार की गई है, जहां ड्रोन तकनीक का उपयोग OHE के निरीक्षण और थर्मल इमेजिंग के लिए किया जा रहा है। इस पर साल में 30 लाख खर्च होंगे।

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?
- यह उन्नत तकनीक OHE में इन समस्याओं की तुरंत पहचान करेगी।
- संभावित ढीले कनेक्शन
- अधिक तापमान वाले पॉइंट (हॉटस्पॉट)
- दूसरी इलेक्ट्रिकल समस्या
ये लाभ मिलेगा
इस ड्रोन आधारित मॉनिटरिंग से न केवल रखरखाव की दक्षता बढ़ेगी बल्कि यह भारतीय रेल को एआई-सक्षम प्रोडक्टिव मेंटेनेंस (AI-enabled Predictive Maintenance) की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की ओर भी अग्रसर करेगा।
OHE को समझिए
रेलवे में ओवरहेड इक्विपमेंट (Overhead Equipment – OHE) उन सभी उपकरणों और तारों की पूरी व्यवस्था को कहा जाता है जो बिजली से चलने वाली ट्रेनों (इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव) को विद्युत शक्ति प्रदान करने के लिए रेलवे ट्रैक के ऊपर लगाए जाते हैं। इसे हिंदी में ऊपरी उपस्कर या संक्षेप में ओएचई कहा जाता है।

OHE सिस्टम के काम
बिजली आपूर्ति: यह ट्रैक्शन सब-स्टेशन (TSS) से प्राप्त हाई वोल्टेज (आमतौर पर भारतीय रेलवे में 25 किलोवोल्ट AC) बिजली को इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव (ट्रेन का इंजन) तक पहुंचाता है। करंट कलेक्शन: लोकोमोटिव के ऊपर लगे उपकरण, जिसे पेंटोग्राफ कहा जाता है, इस ओएचई तार को छूता है और बिजली खींचकर इंजन को देता है, जिससे ट्रेन चलती है। संरचना (Structure): इस पूरे सिस्टम को ट्रैक के ऊपर सही ऊँचाई और तनाव पर बनाए रखने के लिए खंभे (मास्ट) और सपोर्टिंग आर्म्स (कैंटिलीवर) का उपयोग किया जाता है।
थर्मल इमेजिंग जांच क्या है?
ओएचई (ओवरहेड इक्विपमेंट) की थर्मल इमेजिंग जाँच एक गैर-संपर्क (non-contact) निरीक्षण विधि है, जिसमें इन्फ्रारेड कैमरे का उपयोग करके ओएचई प्रणाली के विभिन्न घटकों के तापमान को मापा और उनकी कल्पना (image) की जाती है। इसे थर्मोग्राफी भी कहते हैं।
थर्मल इमेजिंग जांच में इंफ्रारेड (अवरक्त) कैमरे बिजली के तारों, कनेक्टरों और अन्य उपकरणों द्वारा उत्सर्जित ताप ऊर्जा (गर्मी) को पकड़ते हैं। यह कैमरा इस गर्मी को एक दृश्य छवि (विज़ुअल इमेज) में बदल देता है, जहाँ अलग-अलग तापमान को अलग-अलग रंगों से दर्शाया जाता है।
चमकीले/हल्के रंग (जैसे पीला, लाल, सफेद): ये रंग सामान्य से अधिक तापमान वाले क्षेत्रों को दर्शाते हैं, जिन्हें हॉटस्पॉट (Hotspots) कहा जाता है। गहरे रंग (जैसे नीला, काला): ये सामान्य या ठंडे तापमान वाले क्षेत्रों को दर्शाते हैं।
ये रहे उपस्थित
शुभारंभ के मौके पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के प्रधान मुख्य विद्युत इंजीनियर, राजीव कुमार बरनवाल, और रायपुर मंडल रेल प्रबंधक, मंडल के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिनमें बजरंग अग्रवाल (अपर मंडल रेल प्रबंधक, रायपुर), अनुराग तिवारी (वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर/ऑपरेशन, रायपुर)।
प्रतीक मिश्रा (वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर/टीआरडी, रायपुर), अमित गुप्ता (वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर/टीआरएस, भिलाई), विवेक पटेल (वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर/इलेक्ट्रिकल जनरल, रायपुर) और अभिनव कुमार राठौर (मंडल विद्युत इंजीनियर/टीआरडी, रायपुर) शामिल थे।
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