कांकेर जिले के चारामा स्थित पीएम श्री स्वामी आत्मानंद स्कूल में भवन की कमी और छात्रों की अधिक संख्या के कारण दो पालियों में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। सुबह 7:45 बजे पहली पाली शुरू होने से छोटे बच्चों को कड़ाके की ठंड में स्कूल पहुंचना पड़ रहा है,
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स्कूल की पहली पाली सुबह 7:45 बजे से 11:45 बजे तक चलती है, जिसमें नर्सरी से कक्षा 8 तक के छात्र शामिल होते हैं। इनमें 4 साल से कम उम्र के नन्हे बच्चे भी होते हैं। दूसरी पाली 11:45 बजे से शाम 4:45 बजे तक संचालित होती है, जिसमें 12 वर्ष से अधिक उम्र के छात्र पढ़ाई करते हैं।
नवंबर और दिसंबर के महीनों में क्षेत्र में तापमान काफी गिर जाता है और सुबह 7:45 बजे तक घना कोहरा छाया रहता है। दूर-दराज से आने वाले बच्चों को स्कूल बस में सवार होकर आना पड़ता है। बस चालकों को कोहरे में वाहन चलाने में जोखिम का सामना करना पड़ता है।
बस ड्राइवर की परेशानी
क्योंकि कक्षाएं सुबह 7:45 बजे शुरू होती हैं, इसलिए बच्चों को अपने घरों से सुबह 7 बजे से पहले ही निकलना पड़ता है। स्कूल बस ड्राइवर टकेश्वर सिन्हा ने बताया कि वे बच्चों को लाने के लिए सुबह करीब 6 बजे घर से निकलते हैं। कई बच्चों के घर 15 से 20 किलोमीटर दूर हैं, और सभी बच्चों को घर से लाने में डेढ़ से दो घंटे लग जाते हैं। बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि ठंड के महीनों में स्कूल के समय में बदलाव किया जाना चाहिए।

छोटी कक्षाओं का सुबह का समय
स्कूल प्रबंधक के अनुसार, बच्चों की संख्या अधिक होने और स्कूल भवन की कमी के कारण स्कूल दो पाली में संचालित किया जाता है। पहली पाली सुबह 7:45 से 11:45 तक रहती है, जिसमें छोटे बच्चे शामिल होते हैं। इस पाली में नर्सरी से लेकर कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थी आते हैं। दूसरी पाली में कक्षा नौवीं से कक्षा बारहवीं तक की कक्षाएँ संचालित की जाती हैं।

पालकों की ठंड में समय बदलने की मांग
बच्चों के पालकों का कहना है कि स्कूल के समय के कारण उन्हें काफी परेशानी हो रही है। सुबह-सुबह कोहरा रहता है और ठंड भी अधिक होती है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले बच्चे सुबह 7:00 बजे तक स्कूल पहुंच जाते हैं, जिससे उन्हें ठंड में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। पालकों का कहना है कि स्कूल प्रशासन को समय में बदलाव करना चाहिए, क्योंकि स्कूल में बहुत छोटे बच्चे भी पढ़ते हैं।
फिलहाल स्कूल का समय सुबह 7:00 बजे से 11:30 बजे तक है। कई बच्चे 15 से 20 किलोमीटर दूर से आते हैं, इसलिए उन्हें बहुत सुबह तैयार करना पड़ता है। इसके अलावा स्कूल बसें अपने निर्धारित समय पर ही पहुंचती हैं, जिसके कारण बच्चों को मजबूरन सुबह 7:00 बजे स्कूल आना पड़ता है।
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