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जिले के विभिन्न स्कूलों, कॉलेज व गांव में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत बीसीएस पीजी कॉलेज धमतरी में कार्यक्रम आयोजित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के संरक्षण अधिकारी यशवंत बैस ने बताया कि वर्ष 2029 तक देश को पूर्णता बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य है। यदि लड़कों का विवाह 21 वर्ष से पहले और लड़कियों का विवाह 18 वर्ष से पहले किए जाने पर भारतीय न्याय संहिता के अनुसार गैर जमानती अपराध है।
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की जानकारी देते हुए बताया कि विवाह में शामिल सभी सहयोगी- बाराती, रिश्तेदार, टेंट हाउस, हलवाई, पंडित आदि सभी अपराधी की श्रेणी में आते हैं, जिनके लिए 2 वर्ष की सजा व 1 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी व पंचायत सचिव भी इस पर कार्रवाई करने के लिए अधिकृत है। किसी भी बाल विवाह की जानकारी मिलने पर तुरंत 1098 हेल्पलाइन नंबर पर सूचना देनी चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित सभी को शपथ भी दिलाई गई। परियोजना समन्वयक नीलम साहू ने कहा कि बाल विवाह की सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है।
उन्होंने बताया कि रायपुर व स्थानीय टीम संयुक्त रूप से कार्रवाई करती है। माता-पिता और परिवार द्वारा रूढ़िवादी सोच व कम शिक्षित होने के कारण आज भी बाल विवाह के उदाहरण देखने को मिलते हैं, जिससे बच्चों का शारीरिक विकास प्रभावित होता है और कुपोषण की संभावना बढ़ जाती है। इस अवसर पर परियोजना समन्वयक नीलम साहू, निशा साहू, डॉ. हेमवती ठाकुर, डॉ. सपना ताम्रकार, जयश्री पंचांगम, आकांक्षा कश्यप, पल्लवी बरडिया, कुशल चोपड़ा, डॉ. मीनाक्षी तिवारी, डॉ. डिकेश्वरी ध्रुव, भीषम साहू, भूपेंद्र साहू, निशा तिवारी व अन्य रहे।
प्राचार्य डॉ. वीके पाठक ने कहा कि शिक्षा और जागरूकता ही बाल विवाह रोकने का सशक्त साधन है। समाज और राष्ट्र के प्रति हमारे दायित्वों में बाल विवाह उन्मूलन महत्वपूर्ण कड़ी है और सभी को इसे रोकने में सक्रिय योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. तामेश्वरी साहू द्वारा तथा आभार प्रदर्शन डॉ. वेदवती देवांगन द्वारा किया गया।
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