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वीणापाणि साहित्य समिति दुर्ग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना एवं सम्मान समारोह का 26वां आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों ने मां वीणापाणि और छत्तीसगढ़ महतारी की पूजा से की। समिति के अध्यक्ष डॉ. नरेन्द्र देवांगन ने राजगीत गाया। उन्होंने बताय कि वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की घोषणा की पूर्व संध्या से ही यह आयोजन प्रतिवर्ष किया जाता है। समारोह की दृष्टि से यह 26वां आयोजन है।
इस वर्ष छत्तीसगढ़ी साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए प्रो. राजन यादव विभागाध्यक्ष हिन्दी, अधिष्ठाता लोकसंगीत एवं कला संकाय इंदिरा कला संगीत विवि खैरागढ़ और संगीत के क्षेत्र में कार्तिक राम भोसले को पूर्व अध्यक्ष स्व. प्रदीप वर्मा की स्मृति में प्रशांत वर्मा द्वारा तथा आध्यात्मिक-धार्मिक क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान के लिए मानस मर्मज्ञ ठोकेलाल देवांगन का सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में छत्तीसगढ़ी साहित्यिक संगोष्ठी हुई। इसमें मुख्य वक्ता राजन यादव ने छत्तीसगढ़ी साहित्य तब और अब, विषय पर बताया कि कबीरदास के शिष्य धनी धरमदास को छत्तीसगढ़ी के आदिकवि का दर्जा प्राप्त है, जिनके पदों का संकलन एवं प्रकाशन हरि ठाकुर ने किया है।
मुख्य अतिथि डॉ. डीपी देशमुख ने बताया कि छत्तीसगढ़ी के विकास में विद्याभूषण मिश्र, मुकंद कौशल, हेमनाथ वर्मा विकल, बिसंभर यादव, पालेश्वर शर्मा, रघुवीर अग्रवाल पथिक, राम कैलाश तिवारी जी आदि कवियों का विशेष योगदान रहा। उन्होंने अन्य विभूतियों के विषय में भी जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि बीके वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य अपने आप में वृहद और अत्यंत समृद्ध है। कवि सम्मेलन हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. संजय दानी ने की। काव्य पाठ करने वालों में डॉ. नरेन्द्र शामिल रहे।
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