सरगुजा संभाग के कई हिस्सों में सुबह तक घना कोहरा छाया रहा। विजिबिलिटी घटकर 20 मीटर रह गई।
छत्तीसगढ़ में अगले चार दिनों तक मौसम विभाग ने कोई विशेष बदलाव की संभावना नहीं जताई है। हालांकि इसके बाद तापमान में और गिरावट आ सकती है, यानी आने वाले दिनों में ठंड बढ़ेगी। इन चार दिनों बाद प्रदेश के कई जिलों में शीतलहर चलने के आसार भी बन रहे हैं
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अब भी उत्तर और मध्य क्षेत्र में कड़ाके की ठंड जारी रहेगी। सरगुजा संभाग के कई इलाकों में सुबह तक घना कोहरा छाया रहा, यहां विजिबिलिटी घटकर सिर्फ 20 मीटर तक रह गई थी। वहीं दिसंबर में ठंड बढ़ने से स्किन से संबंधित समस्या भी बढ़ी हैं।
मेकाहारा में हर दिन औसतन 300-350 मरीज पहुंच रहे हैं। ज्यादातर को ड्राई स्किन, एक्जिमा और सोरायसिस की शिकायत है। डर्मेटोलॉजी डिपार्टमेंट के HOD डॉक्टर मृत्युंजय सिंह ने बताया- ठंड में ये आम है, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया तो खतरा बढ़ सकता है।
दिसंबर में ज्यादातर शहरों का तापमान 10°C से नीचे पहुंच गया है, जिनमें मैनपाट, अंबिकापुर, पेंड्रा और जगदलपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव शामिल हैं। मैनपाट में रात का पारा 4°C से नीचे चला गया और वहां ओस की बूंदें जमकर बर्फ में बदल गई।
अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 6°C, पेंड्रा में 8.2°C और जगदलपुर में 9.6°C, दुर्ग में 9.4 डिग्री दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे की बात करें तो सबसे अधिक तापमान 29.3°C जगदलपुर में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 6°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया।
मौसम से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए…

सरगुजा संभाग के प्रतापपुर इलाके में सुबह तक धुंध छाई रही।

सरगुजा के प्रतापपुर इलाके में सुबह धुंध के कारण विजिबिलिटी घटकर 20 मीटर रह गई।

मैनपाट में पैरावट में ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई।

सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। 2 दिन पहले अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा था।

GPM जिले में मध्यप्रदेश बॉर्डर से सटे धर्मपानी की पहाड़ी का नजारा।

पेंड्रा में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं।
रायपुर में नगर निगम ने कई जगहों पर अलाव का इंतजाम किया
रायपुर में शीतलहर का असर बढ़ते ही नगर निगम ने आम लोगों को राहत देने के लिए शहर में अलाव जलाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। निगम ने 12 से अधिक लोकेशन पर रातभर अलाव जलवाने के निर्देश दिए हैं, ताकि बेघर, राहगीरों और आम नागरिकों को ठंड से तुरंत राहत मिल सके।
रायपुर नगर निगम की मेयर मीनल चौबे और कमिश्नर विश्वदीप के निर्देशों के बाद सभी जोन कमिश्नरों और जोन हेल्थ अधिकारियों से रात में फील्ड में रहने और अलाव के इंतजाम की निगरानी करने को कहा गया है।

स्वास्थ्य विभाग ने भी जारी की एडवाइजरी
स्वास्थ्य विभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि शीतलहर के दौरान, केवल आवश्यकता होने पर ही यात्रा करें और बाहर निकलते समय पूरी तरह गर्म कपड़े पहनें।

ठंड में स्किन की ये समस्याएं ज्यादा
1. रूखी और फटी त्वचा
- त्वचा की नेचुरल नमी खत्म हो जाती है
- हाथ-पैर, होंठ और एड़ियां ज्यादा फटती हैं
2. खुजली और जलन
- सूखापन बढ़ने से इचिंग
- खुजलाने से रैश और इन्फेक्शन का खतरा
3. एक्जिमा और सोरायसिस बढ़ना
- ठंड में पुराने स्किन मरीजों की परेशानी बढ़ती है
- लाल पैच, पपड़ी और तेज खुजली
4. होंठों का फटना
- लिप्स पर स्किन बहुत पतली होती है
- बार-बार जीभ लगाने से हालत और खराब
5. डल और बेजान त्वचा
- ब्लड सर्कुलेशन कम होने से ग्लो घटता है
6. फंगल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन
- गीले कपड़े, पसीना और बंद जूते इन्फेक्शन बढ़ाते हैं

ठंड में इस तरह स्किन का रखें ध्यान
- मॉस्चराइजर जरूरी
- नहाने के तुरंत बाद थिक क्रीम या बॉडी लोशन लगाएं
- दिन में 2-3 बार लगाना बेहतर। ग्लिसरीन, सेरामाइड, शिया बटर वाले प्रोडक्ट चुनें
- बहुत गरम पानी त्वचा की नमी छीन लेता है, गुनगुना पानी सबसे सही
- हार्श साबुन से बचें
- माइल्ड, मॉइस्चराइजिंग बॉडी वॉश इस्तेमाल करें
- ठंड में प्यास कम लगती है, लेकिन पानी पीना उतना ही जरूरी
- ठंड में भी UV किरणें नुकसान करती हैं
- बाहर निकलते समय SPF 30+ सनस्क्रीन लगाएं
- ऊन सीधे त्वचा पर न पहनें
- अंदर कॉटन कपड़ा रखें
- रात में पैरों पर मोटी क्रीम लगाकर मोजे पहनें
- हाथ धोने के बाद क्रीम जरूर लगाएं
मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है।
वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े।

डॉक्टर बोले- सतर्क रहना जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से तापमान बदल रहा है, बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि…
- शाम के बाद घर और आसपास मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले कॉइल/लिक्विड का उपयोग करें।
- स्लीपिंग नेट (Insecticide Treated Net – ITN) या लॉन्ग लास्टिंग मच्छरदानी (LLIN) का उपयोग रात में जरूर करें।
- घर के दरवाजे-खिड़कियों पर जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सके
पानी जमा न होने दें
- कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी, बर्तन आदि में पानी जमा न रहने दें।
- सप्ताह में कम से कम एक बार इन्हें साफ और सूखा करें।
- नाली व ड्रेनेज सिस्टम खुला और साफ रखें।
शरीर को ढककर रखें
- खासकर शाम के समय पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें।
- बच्चों को भी हल्के लेकिन ढकने वाले कपड़े पहनाएं।
समय पर जांच और इलाज कराएं
- यदि बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं।
- मलेरिया फैलने का आधार
- तापमान 33-39°C (दिन में)
- तापमान 14-19°C (रात में)
ऐसा तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल होता है। छत्तीसगढ़ में तापमान अभी इसी तरह का हो रखा है। यानी छत्तीसगढ़ में मलेरिया फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। अगले आठ दिनों में मलेरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण/जंगल क्षेत्रों में।
2 तरह के मलेरिया का खतरा
- प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (गंभीर प्रकार का मलेरिया)
- प्लास्मोडियम विवैक्स (सामान्य लेकिन बार-बार लौटने वाला मलेरिया) छत्तीसगढ़ में 11 नवंबर तक प्लास्मोडियम विवैक्स के बढ़ने का ही खतरा ज्यादा है। ऐसे में अपने आस-पास के इलाके में पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का उपयोग करें। फुल स्लीव के कपड़े पहनें। बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत जांच कराएं।
इन राज्यों में भी जोखिम
- पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम आदि)
- गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा, नागालैंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक
- उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और छत्तीसगढ़ के कुछ जिले
सर्दियों में इम्यूनिटी मजबूत करें

गर्म पानी से भाप लेना फायदेमंद
अगर बंद नाक की समस्या है तो गर्म पानी से भाप लेना बेहद फायदेमंद है। भाप नाक के जरिए हमारे शरीर में जाकर गर्मी पैदा करती है। नाक में जमा म्यूकस भाप की गर्मी से ढीला हो जाता है, जिससे बंद नाक की समस्या दूर हो सकती है।
इसके लिए एक बाउल में गर्म पानी लें। फिर सिर को एक कॉटन टॉवेल से ओढ़ लें। इसके बाद बर्तन का ढक्कन हटाकर 5 से 10 मिनट तक भाप लें।
गले में खराश होने पर करें नमक-पानी के गरारे
आमतौर पर गले में खराश वायरस के कारण होती है। नमक-पानी के गरारे से इसमें राहत मिलती है। अगर सर्दी-खांसी ज्यादा है तो नमक-पानी में तुलसी की कुछ पत्तियां भी मिला सकते हैं।
तुलसी में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो सर्दी-खांसी में काफी आराम पहुंचाते हैं। इसके लिए कम-से-कम एक कप गर्म पानी में एक चौथाई चम्मच नमक घोलकर गरारे कर सकते हैं।

विटामिन C रिच डाइट लें
विटामिन C एंटीऑक्सीडेंट्स का काम करती है, जो शरीर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाती है। विटामिन C की कमी से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इसके लिए सर्दियों में विटामिन C से भरपूर चीजें जैसे संतरा, नींबू, आंवला को अपनी डाइट में शामिल करें। इससे न सिर्फ इम्यूनिटी स्ट्रॉन्ग होगी, बल्कि वायरल इन्फेक्शन का खतरा भी कम होता है।
अदरक-तुलसी की चाय बेहद फायदेमंद
अदरक और तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार हैं। इसकी चाय पीने से वायरल इन्फेक्शन से बच सकते हैं।
इसके अलावा तुलसी और अदरक का काढ़ा बनाकर भी पी सकते हैं। यह शरीर में जमे कफ को बाहर निकलता है। साथ ही सर्दी-ज़ुकाम, खांसी और गले की खराश में आराम दिलाता है।

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