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Home » Chhattisgarh tops the country in disposal of POCSO cases | पॉक्सो मामलों के निपटारे में छत्तीसगढ़ देश में टॉप पर: देश में 109 प्रतिशत का औसत, छत्तीसगढ़ में 189 प्रतिशत, 600 ई-पॉक्सो कोर्ट की जरूरत – Raipur News
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Chhattisgarh tops the country in disposal of POCSO cases | पॉक्सो मामलों के निपटारे में छत्तीसगढ़ देश में टॉप पर: देश में 109 प्रतिशत का औसत, छत्तीसगढ़ में 189 प्रतिशत, 600 ई-पॉक्सो कोर्ट की जरूरत – Raipur News

By adminDecember 19, 2025No Comments2 Mins Read
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भारत ने बाल यौन शोषण के मामलों में न्याय दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश में पहली बार एक साल में दर्ज हुए पॉक्सो मामलों से अधिक मामलों का निपटारा हुआ है। सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज फॉर चिल्ड्रन (C-LAB) की रिपोर्ट ‘पें

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छत्तीसगढ़ ने इस दिशा में सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य में वर्ष 2025 में पॉक्सो कानून के तहत 1,416 मामले दर्ज हुए, जबकि अदालतों ने 2,678 मामलों का निपटारा किया। यानी निपटान दर 189 प्रतिशत रही। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य की अदालतों ने न सिर्फ नए मामलों का तेजी से निपटारा किया बल्कि पुराने लंबित मामलों को भी बड़े पैमाने पर खत्म किया।

2023 में 2.62 लाख मामले थे लंबित

रिपोर्ट बताती है कि देश में न्याय व्यवस्था अब ‘लंबित मामलों को संभालने’ से आगे बढ़कर उन्हें सक्रिय रूप से कम करने की दिशा में काम कर रही है। 2023 तक देश में पॉक्सो के 2.62 लाख मामले लंबित थे, लेकिन अब यह संख्या घटने लगी है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा रफ्तार कायम रही तो अगले चार वर्षों में लंबित मामलों को पूरी तरह समाप्त करने के लिए देशभर में 600 अतिरिक्त ई-पॉक्सो अदालतों की स्थापना जरूरी होगी। इसके लिए लगभग 1,977 करोड़ रुपये का प्रावधान सुझाया गया है, जिसमें निर्भया फंड का उपयोग करने की सिफारिश की गई है।

AI के उपयोग से मामले में आ सकती है तेजी

इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के निदेशक पुरुजीत प्रहराज ने कहा कि यह केवल आंकड़ों की सफलता नहीं, बल्कि बच्चों के न्याय पर भरोसे की वापसी है। उन्होंने कहा हर दिन की देरी बच्चे के मानसिक आघात को और गहरा करती है। इसलिए यह गति बनाए रखना न सिर्फ प्रशासनिक, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने के लिए राज्यों को तकनीकी सहयोग, एआई आधारित कानूनी उपकरणों और ई-कोर्ट सिस्टम का उपयोग बढ़ाना चाहिए, ताकि हर बच्चे को समय पर न्याय मिल सके।



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