रायपुर नगर निगम के भाजपा पार्षद कैलाश बेहरा को अनुकंपा आधार पर भृत्य (चपरासी) के पद पर नियुक्ति दे दी गई है। उनकी मां की मौत के बाद शासन ने यह नियुक्ति आदेश जारी किया है। हालांकि, इस फैसले को लेकर अब सियासी बवाल खड़ा हो गया है।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस नियुक्ति को पूरी तरह नियम के खिलाफ बताया है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार ने अनोखा कारनामा किया है। किसी जनप्रतिनिधि को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती।
उन्होंने कहा कि यह फैसला लगता है भांग खाकर लिया गया है। किसी भी निर्वाचित प्रतिनिधि को सरकारी सेवा में नियुक्त नहीं किया जा सकता, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो। यह नियमों की सीधी अवहेलना है।

जानिए क्या है मामला ?
कैलाश बेहरा रायपुर नगर निगम में भाजपा के पार्षद हैं। उनकी मां नगर निगम की कर्मचारी थीं और उनके निधन के बाद बेहरा ने अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। शासन ने इस पर विचार करते हुए उन्हें निगम में भृत्य के पद पर नियुक्त कर दिया। आदेश 16 सितंबर 2025 को जारी किया गया है
छोड़ना पड़ सकता है पार्षद का पद
एक तरफ पार्षद के रूप में वह पहले से ही निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, दूसरी तरफ उन्हें सरकारी कर्मचारी के तौर पर नियुक्त किया जा रहा है। यह दोहरी भूमिका न केवल संवैधानिक रूप से सवालों के घेरे में है, बल्कि प्रशासनिक नियमों के भी खिलाफ मानी जा रही है।
नहीं मिला कैलाश बेहरा की तरफ से कोई जवाब
इस पूरे मामले में जब पार्षद कैलाश बेहरा से उनका पक्ष जानने के लिए कई बार कॉल किया गया, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला।
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