गरियाबंद के मैनपुर में हाथी प्रभावित 30 गांवों के 2 हजार से अधिक ग्रामीणों, किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने फसल नुकसान के लिए उचित मुआवजे और क्षेत्र को हाथी मुक्त करने सहित 10 सूत्रीय मांगों को
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ग्रामीणों की मुख्य मांग फसल क्षतिपूर्ति राशि को 9 हजार रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर 75 हजार रुपए प्रति एकड़ करना है। इसके अलावा जनहानि की स्थिति में 50 लाख रुपए का मुआवजा देने की भी मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 15 दिन बाद प्रभावित गांवों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए जाएंगे।
मैनपुर के दुर्गा मंच के सामने एकत्रित होने के बाद, महिला और पुरुष प्रदर्शनकारी रैली के रूप में वन कार्यालय की ओर बढ़े। हालांकि, प्रवेश द्वार पर तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की झड़प भी हुई। स्थिति को देखते हुए, उपनिदेशक वरुण जैन सहित वन विभाग के अधिकारी परिसर के बाहर आए और ग्रामीणों से बातचीत की।

ग्रामीणों को दिया आश्वासन
वरुण जैन ने हाथी प्रभावित इलाकों में सुरक्षा उपायों, हाथियों के विचरण के लिए पर्याप्त इंतजामों, रोजगार सृजन, हाथी ऐप, 24 घंटे काम करने वाले ट्रैकर्स और हाथी मित्रों के प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को शासन स्तर पर अवगत कराया जाएगा। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों पर अड़े रहने और मांगे न माने जाने पर 15 दिन बाद गांव-गांव में प्रदर्शन करने की बात दोहराई।

ग्राम स्तर पर विरोध प्रदर्शन की चेतावनी
ग्रामीण मृतक परिवार को 50 लाख के अलावा वर्तमान दर पर फसल का आकलन कर प्रति एकड़ 75 हजार रुपए की मांग पर अड़े हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जिला पंचायत सदस्य लोकेश्वरी नेताम और संजय नेताम ने बताया कि 15 दिवस में उनकी मांगें नहीं मानी गई तो ग्राम स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो जाएगा। लोकेश्वरी नेताम ने कहा कि फसल नुकसान पर विभाग 9 हजार रुपए प्रति एकड़ क्षतिपूर्ति दे रही है।
लंबित मुआवजा की मांग भी रखा गया
पिछले कई सालों से यह देते आ रही है,जबकि हमने 75 हजार प्रति एकड़ मुआवजा की मांग रखा है। मकान टूटने और जनहानि पर भी मुआवजा मांग किया गया है। लंबित मुआवजा की मांग भी रखा गया है। संजय नेताम ने कहा कि हाथी विचरण इलाके का दायरा तय नहीं है, दिन रात ग्रामीण भय में जी रहे। 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन अफसरों से केवल कोरा आश्वासन मिला।इसलिए आंदोलन की रणनीति आगे भी तय की जाएगी।
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