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टोनही प्रताड़ना और अंधविश्वास की बलि चढ़ते लोग: छत्तीसगढ़ में 5 वर्षों में 90 से ज्यादा कत्ल, पुलिस ने कसी कमर

छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास और लालच की जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि लोग अपनों के ही खून के प्यासे हो रहे हैं। राज्य में जादू-टोना के शक और गड़े हुए सोने को पाने की चाहत में लगातार हत्याएं हो रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन वारदातों को अंजाम देने वाले कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि पीड़ित के पड़ोसी या सगे रिश्तेदार ही निकल रहे हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में जादू-टोना के संदेह में 90 से अधिक लोगों की जान ली जा चुकी है।

एनसीआरबी 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में जादू-टोने से जुड़ी कुल 54 हत्याएं दर्ज की गई थीं, जिनमें से 10 मामले अकेले छत्तीसगढ़ से थे। इस आंकड़े के साथ छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा है। साल 2021 से 2026 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो यह संख्या 90 के पार पहुंच जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन हत्याओं के पीछे मुख्य रूप से लालच, अंधविश्वास और कथित तांत्रिकों का बढ़ता प्रभाव जिम्मेदार है, जो भोले-भाले लोगों को गुमराह कर हिंसक वारदातों के लिए उकसाते हैं।

हालिया घटनाओं पर नजर डालें तो 12 अक्टूबर 2026 को डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र के चौथना गांव में एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। यहां जादू-टोने के शक में भतीजे हेमंत और सोनू ने अपनी मां के साथ मिलकर अपनी चाची कमला सोनकर और उनके बेटे खुमेन्द्र की धारदार हथियार से हत्या कर दी। इस हमले में चचेरी बहन ममता भी गंभीर रूप से घायल हुई। पुलिस ने केशर बाई, हेमंत और सोनू को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के लिए हथियार और कपड़े जलाने की कोशिश भी की थी, लेकिन पुलिस ने कुल्हाड़ी और बाइक बरामद कर ली।

इसी तरह 8 अक्टूबर 2026 को रायपुर के आरंग स्थित बिरबिरा गांव में एक बुजुर्ग दंपती की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी गई। आरोपी पड़ोसी रॉकी साहू को शक था कि बुजुर्ग दंपती ने जादू-टोना कर उसकी मां की जान ली थी, जिनकी मृत्यु एक साल पहले हुई थी। इसी रंजिश में उसने घर में घुसकर कुल्हाड़ी और हंसिया से हमला कर दोनों के शवों को क्षत-विक्षत कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे मन में बैठा अंधविश्वास सालों तक रंजिश का रूप लेकर हत्या जैसी वारदात में बदल जाता है।

बलौदाबाजार जिले के खरवे गांव में तो अंधविश्वास ने और भी भयानक रूप लिया, जहां 6 फरवरी से 14 मई 2026 के बीच 8 ग्रामीणों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मृतकों में बद्री पटेल, बुढालू साहू, बुधराम जायसवाल, छत्तूराम साहू, विनोद साहू, गजानंद मांझी, चैतूराम साहू और महेतरू साहू शामिल थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी रामसहाय जायसवाल गड़े धन की चाहत और मामूली बातों का बदला लेने के लिए तंत्र-मंत्र का सहारा लेकर लोगों को निशाना बना रहा था। कसडोल थाना पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर इस सिलसिलेवार मौतों का पर्दाफाश किया।

कोरबा जिले में जनवरी 2026 में हुई एक घटना ने तंत्र-मंत्र के नाम पर होने वाली ठगी और हत्या के गठजोड़ को उजागर किया। बरबसपुर के एक स्क्रैप यार्ड में कारोबारी अशरफ मेमन, सुरेश साहू और नीतीश कुमार के शव मिले थे। जांच में पता चला कि बिलासपुर का एक कथित तांत्रिक राजेंद्र कुमार 5 लाख रुपये को तंत्र-मंत्र से ढाई करोड़ रुपये में बदलने का झांसा दे रहा था। इसी लालच में तीनों वहां पहुंचे और अपनी जान गंवा बैठे। पुलिस ने इस मामले में कथित तांत्रिक सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्रा के अनुसार, छत्तीसगढ़ में टोनही के संदेह में महिलाओं को प्रताड़ित करने और मारपीट की घटनाएं चिंताजनक स्तर पर हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 2017 से 2025 के बीच करीब 1350 मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन यदि अनौपचारिक आंकड़ों को जोड़ा जाए तो यह संख्या 3000 से अधिक हो सकती है। तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी के मामले भी लगातार बढ़ रहे हैं, जहां कथित बैगा और तांत्रिक लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें आर्थिक और शारीरिक नुकसान पहुंचा रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन कुरीतियों को रोकने के लिए पुलिस की सख्ती और सामाजिक जागरूकता दोनों अनिवार्य हैं। एडवोकेट विपिन अग्रवाल ने बताया कि कथित तांत्रिक धन वर्षा और बीमारियां ठीक करने का झांसा देकर लोगों को गुमराह करते हैं। छत्तीसगढ़ में इन गतिविधियों को रोकने के लिए ‘टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005’ लागू है। इसके तहत किसी को टोनही कहना या झाड़-फूंक के नाम पर ठगी करना अपराध है। इसके अलावा, हत्या या नरबलि जैसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत उम्रकैद या फांसी की सजा का प्रावधान है।

राज्य में अंधविश्वास के खिलाफ कड़े कानून होने के बावजूद जमीनी स्तर पर शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण ऐसी घटनाएं थम नहीं रही हैं। पुलिस प्रशासन और सामाजिक संगठनों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि वे ग्रामीण अंचलों में फैले इस भ्रम को दूर करें। जब तक लोग वैज्ञानिक सोच को नहीं अपनाएंगे और कथित तांत्रिकों के झांसे में आते रहेंगे, तब तक जादू-टोने और गड़े धन के नाम पर होने वाला यह खूनी खेल बंद होना मुश्किल है।

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