बिलासपुर30 मिनट पहले
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विराट अपहरण कांड में हाईकोर्ट ने सभी 5 आरोपियों की अपील खारिज कर दी है।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाईप्रोफाइल विराट अपहरण कांड में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सभी 5 आरोपियों की अपील खारिज कर दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
फैसले में कोर्ट ने कहा कि मासूम बच्चों का फिरौती के लिए अपहरण करना बेहद गंभीर और संगीन अपराध है। ऐसे अपराध न केवल पीड़ित परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचाते हैं, बल्कि पूरे समाज में डर और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करते हैं।
बता दें है कि साल 2019 में 6 साल के मासूम विराट के अपहरण की साजिश उसकी बड़ी मां ने ही रची थी।

विराट के सुरक्षित मिलने के बाद पुलिस अफसरों को राहत मिला था।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, साल 2019 में कोतवाली थाना क्षेत्र निवासी व्यवसायी विवेक सराफ केबेटे विराट सराफ का घर के सामने से ही कार सवार बदमाशों ने अपहरण कर लिया था। घटना के दूसरे दिन अपहरणकर्ताओं ने विराट के पिता से 6 करोड़ रुपए की फिरौती मांगी थी।
मासूम के अपहरण के बाद पुलिस लगातार छह दिनों तक आरोपियों की तलाश में जुटी रही। सातवें दिन पुलिस ने जरहाभाठा इलाके से विराट को सुरक्षित बरामद कर लिया था। साथ ही मामले में शामिल सभी अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।
बड़ी मां ने ही रची थी अपहरण की साजिश
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि मामले की मुख्य आरोपी नीता सराफ विराट की बड़ी मां थी। उस पर भारी कर्ज था, जिसे चुकाने के लिए उसने अपने परिचित अनिल सिंह के साथ मिलकर पहले एक अन्य रिश्तेदार सत्यनारायण सराफ के बेटे के अपहरण की साजिश रची थी।
हालांकि, परिवार के शहर से बाहर चले जाने के बाद आरोपियों ने अपना निशाना बदल दिया और 6 साल के विराट सराफ के अपहरण की साजिश रची। इस साजिश में बिलासपुर के ही सतीश शर्मा, राजकिशोर सिंह और हरेकृष्ण कुमार को भी शामिल किया गया था।

ये तस्वीर नीता सराफ की है, जो कि विराट की बड़ी मां है, इसी ने पैसों के लालच में अपहरण की साजिश ने रची थी।
बिना नंबर की कार से बच्चे का अपहरण
20 अप्रैल 2019 की शाम विराट अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान आरोपी बिना नंबर की सफेद वैगन-आर से वहां पहुंचे। आरोपी हरेकृष्ण ने विराट का मुंह दबाकर उसे जबरन कार में खींच लिया।
इसके बाद बच्चे को रेलवे स्टेशन ले जाया गया, जहां उसे राजकिशोर की डस्टर कार में शिफ्ट कर जरहाभाठा स्थित एक मकान में बंधक बनाकर रखा गया।
धमकी देकर मांगी 6 करोड़ की फिरौती
अपहरण के दूसरे दिन विराट के पिता विवेक के पास 6 करोड़ रुपए की फिरौती मांगने के लिए फोन आया। आरोपियों ने धमकी दी कि अगर बच्चे को सकुशल वापस चाहते हो तो पैसों का इंतजाम कर लो, वरना उसे जान से मारकर फेंक देंगे। इसके बाद घबराए पिता ने मामले की शिकायत सिटी कोतवाली थाने में दर्ज कराई।
घर पर पूरे समय बैठी रहती थी आरोपी बड़ी मां
अपहरण के बाद से ही नीता सराफ रोज सुबह से शाम तक पीड़ित परिवार के घर पर बैठी रहती थी। इस दौरान वह पुलिस और परिवार की हर रणनीति की जानकारी अपने साथियों तक पहुंचा रही थी।
स्पेशल टीम ने जब फिरौती मांगने वाले नंबर को सर्विलांस पर लिया तो उसकी लोकेशन यूपी, बिहार और बिलासपुर के बीच ट्रेस हुई। कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच में सामने आया कि सभी पांचों आरोपी लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे।
26 अप्रैल 2019 की सुबह पुलिस ने जरहाभाठा स्थित राजकिशोर के सूने मकान पर छापा मारा। कमरे का ताला तोड़कर पुलिस ने मासूम विराट को बरामद कर लिया। मौके से आरोपी हरेकृष्ण को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट ने कहा कि आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील
इस अपहरण मामले में पुलिस ने चालान पेश करते हुए आरोपियों की साजिश से जुड़े सभी सबूत अदालत के सामने रखे थे। विराट की बड़ी मां नीता सराफ समेत सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले थे। जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी सबूत जुटाकर आरोपियों के बीच की कड़ी को मजबूत किया था।
ट्रायल के दौरान 54 लोगों की गवाही हुई, जिसमें यह साबित हुआ कि बच्चे का अपहरण प्लानिंग तरीके से फिरौती के लिए किया गया था। सभी पक्षों को सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट ने दो साल पहले सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट बोला- समाज में डर पैदा करने वाला अपराध
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि मासूम बच्चों का फिरौती के लिए अपहरण करना बेहद गंभीर और संगीन अपराध है। यह अपराध न केवल पीड़ित परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचाता है, बल्कि पूरे समाज में डर और असुरक्षा की भावना भी पैदा करता है।
हाईकोर्ट ने माना कि पुलिस ने सीडीआर, फिंगरप्रिंट, सीसीटीवी फुटेज और वॉयस सैंपल जैसे तकनीकी साक्ष्यों के जरिए आरोपियों के खिलाफ मजबूत और अटूट साक्ष्य पेश किए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे में आरोपियों को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने सभी दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि वे जेल में ही अपनी सजा काटेंगे।
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पिता ने कहा- 5 साल बाद मिला न्याय।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में साल 2019 में हुए ‘विराट’अपहरण कांड के सभी दोषियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 6 साल के मासूम विराट के अपहरण की साजिश उसकी बड़ी मां ने ही रची थी। पुलिस ने इस केस में विराट की बड़ी समेत पांच अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। अब इस मामले में पांच साल बाद फैसला आया है। पढ़ें पूरी खबर…

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