बिलासपुर पुलिस का 49 दिवसीय साइबर जागृति महाअभियान संपन्न, 18 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा संदेश


बिलासपुर में साइबर जागृति अभियान के तहत पुलिस ने सभी वर्ग के लोगों को कई तरीकों से जागरूक करने का प्रयास किया है। इसी के साथ साइबर जागरूकता में बिलासपुर पुलिस पूरे प्रदेश में 23 से सीधे 2 स्थान पर आ चुकी है। शुक्रवार को लखीराम ऑडिटोरियम में 49 दिनों तक चले इस अभियान का समापन हुआ।
पुलिस के 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चले साइबर जागृति महाअभियान के दौरान जिले में 18 लाख से अधिक लोगों तक साइबर जागरूकता का संदेश पहुंचा। इंटरनेट और मोबाइल आज हर व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में साइबर ठगी से बचाव के लिए सिर्फ पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का जागरूक होना जरूरी है। इसी उद्देश्य के साथ पुलिस ने साइबर जागृति महाअभियान शुरू किया।
इस अभियान के दौरान विद्यार्थियों, महिलाओं, बुजुर्गों, कर्मचारियों, व्यापारियों, श्रमिकों, ग्रामीणों और खेल व सामाजिक संगठनों सहित अलग-अलग वर्गों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया। समापन कार्यक्रम में बच्चों ने कत्थक और साइबर जागरूकता पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। फियोना खान ने कत्थक में जगत जननी मां गीत पर तबले और थाप पर नृत्य कर लोगों का ध्यान खींचा। वहीं, डी फॉर डांस एकेडमी के बच्चों ने हास्य रस से भरा नाट्य-नृत्य की प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने अतिथियों को हंसने पर मजबूर कर दिया। बच्चों की इस प्रस्तुति ने साइबर फ्रॉड के अलग-अलग तरीकों को गीत और नाटक के जरिए जागरूकता संदेश में बदल दिया।
साइबर क्राइम के फैलते जाल को काटने के लिए सिर्फ पब्लिक की जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। बता दें कि साल 2022 से 2026 तक साइबर क्राइम में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। लेकिन राहत की बात यह है कि लोग भी जागरूक हुए हैं। 2022 में 1050 अपराधों में 23.80 करोड़ की ठगी हुई थी, जिसमें सिर्फ 5.28 प्रतिशत लोगों ने गोल्डन आवर में फोन कर अपने रुपए होल्ड करा सके। इसके बाद 2023 से 2026 तक हर साल क्राइम की संख्या और ठगी की राशि बढ़ती चली गई। लेकिन लोगों की जागरूकता और पुलिस की मुस्तैदी के चलते होल्ड हुई राशि का प्रतिशत 24.44 प्रतिशत तक पहुंच गया है। 2026 के 8 महीनों में 3100 ठगी के मामलों में 12.23 करोड़ में कुल साढ़े 3 करोड़ पुलिस ने लोगों के बचाए हैं।
इस अवसर पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि आज इंटरनेट और मोबाइल से कोई अछूता नहीं है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में डिजिटल दुनिया से जुड़ा हुआ है। ऐसे में साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता सबसे जरूरी है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग सप्ताह में अलग-अलग वर्गों को ध्यान में रखकर अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य लोगों को केवल साइबर अपराध के बारे में बताना नहीं, बल्कि उन्हें ठगी से बचने के तरीके समझाना भी था। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध करने वालों को भी यह समझना होगा कि लोगों को नुकसान पहुंचाकर वे सुरक्षित नहीं रह सकते। ऐसे लोगों के लिए दुनिया नहीं, बल्कि कानून और जेल की जगह है। उन्होंने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि जागरूकता के ऐसे प्रयास कई लोगों के जीवन को अंधकारमय होने से बचा सकते हैं।
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि अभियान का मकसद जिले के हर व्यक्ति को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना था। पुलिस के साथ नागरिकों, सामाजिक संगठनों, मीडिया, शिक्षण संस्थानों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से यह अभियान लगातार 49 दिन चला। इसका परिणाम आने वाले समय में दिखाई देगा और उम्मीद है कि जागरूकता के कारण साइबर ठगी के शिकार होने वाले लोगों की संख्या कम होगी। उन्होंने कहा कि पुलिस के नियमित कामकाज के बीच साइबर जागृति अभियान को लगातार आगे बढ़ाया गया। गांधी जयंती के अवसर पर उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसा के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के समय में इस विचार को अपने जीवन में उतारना प्रासंगिक है। व्यक्ति चाहे तो स्वयं को ऊंचा उठा सकता है। महापुरुषों के विचारों को समझकर उन्हें अपने व्यवहार में उतारने की जरूरत है।
अभियान को सात सप्ताह में बांटकर अलग-अलग वर्गों पर फोकस किया गया। पहले सप्ताह में विद्यार्थी और युवा, दूसरे में बैंकिंग व वित्तीय संस्थाएं, तीसरे में वरिष्ठ नागरिक, चौथे में महिलाएं व छात्राएं, पांचवें में असंगठित क्षेत्र के युवा और श्रमिक, छठवें में शासकीय संस्थाएं तथा सातवें सप्ताह में ग्रामीण एवं अर्धसैनिक क्षेत्र के नागरिकों को जागरूक किया गया। इस दौरान ऑनलाइन ठगी, यूपीआई और क्यूआर कोड फ्रॉड, फिशिंग, विशिंग, स्मिशिंग, ओटीपी फ्रॉड, केवाईसी ठगी, बैंक और कार्ड फ्रॉड, सिम स्वैप, पहचान की चोरी, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, फर्जी प्रोफाइल, साइबर बुलिंग, सेक्सटॉर्शन, मॉर्फ्ड फोटो-वीडियो और डीपफेक जैसे अपराधों से बचाव के तरीके बताए गए।
पुलिस ने साइबर जागरूकता को केवल भाषण और पंपलेट तक सीमित नहीं रखा। लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए कई नए तरीके अपनाए गए। साइबर संवाद में नागरिकों को साइबर अपराधों की जानकारी देने के साथ पीड़ितों के अनुभव भी साझा किए गए। साइबर जुम्बा के जरिए फिटनेस गतिविधि के बीच साइबर सुरक्षा का संदेश दिया गया। रक्षाबंधन पर साइबर जागृति रक्षा सूत्र बांधा गया। नुक्कड़ नाटक, साइबर प्रश्नोत्तरी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हॉकी और एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं, स्केटिंग, ताइक्वांडो और कराटे जैसी गतिविधियों को भी अभियान से जोड़ा गया। गणेश पंडालों में पहुंचकर श्रद्धालुओं को जागरूक किया गया और ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर ग्राम चौपाल लगाई गई। 25 साल में लॉटरी से क्रिप्टो तक साइबर फ्रॉड का ट्रेंड बदला है।



