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बस्तर में बाघों की मौजूदगी पर वन विभाग सतर्क, हर वनमंडल में बनेगा टाइगर मूवमेंट सेल

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव में पिछले एक साल से बाघों की मौजूदगी दर्ज होने के बीच इंद्रावती टाइगर रिजर्व में सात-आठ बाघ होने की संभावना जताई गई है। हालांकि इन तीन जिलों में लगातार दिखाई दे रहे बाघ एक ही हैं या अलग-अलग, इसे लेकर वन विभाग अभी पुख्ता निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है।

बाघों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखने और विज्ञानी तरीके से डाटा जुटाने के लिए अब संबंधित हर वनमंडल में टाइगर मूवमेंट सेल बनाया जाएगा। वन अधिकारियों को निगरानी के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने और सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

वन विभाग के निर्देश के मुताबिक, प्रत्येक संबंधित वनमंडल में वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) की प्रत्यक्ष निगरानी में टाइगर मूवमेंट सेल स्थापित किया जाएगा। संबंधित उप वनमंडलाधिकारी को इसका नोडल अधिकारी बनाया जाएगा। वहीं वन परिक्षेत्र अधिकारियों और बीट अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जाएंगी। जरूरत पड़ने पर वन्यप्राणी वृत्त कार्यालय से समन्वय कर कार्रवाई की जाएगी।

विभाग ने बाघों की लोकेशन सार्वजनिक नहीं करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोकेशन प्रसारित होने पर मौके पर लोगों की भीड़ जुट सकती है। इससे बाघ और आम लोगों दोनों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका रहती है।

पुख्ता सूचना के लिए स्थानीय सूचना तंत्र विकसित करने और सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने के निर्देश दिए गए हैं।

बाघ द्वारा पालतू पशुओं के मारे जाने की सूचना मिलने पर वन अमले को तुरंत मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करना होगा। वन्यप्राणी की पहचान पुख्ता प्रमाणों के आधार पर होने पर मुआवजा प्रकरण तत्काल तैयार कर भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है।

बाघ संरक्षित वन्यजीव है। इसी को देखते हुए संभाग के सातों जिलों के वन अधिकारियों को केवल निगरानी तक सीमित न रहकर सुरक्षा, संघर्ष की रोकथाम, विज्ञानी डाटा संग्रहण और त्वरित प्रतिक्रिया पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।

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