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राज्य की इकलौती मैनमेड जंगल सफारी में विशेषज्ञों की भर्ती का घोटाला फूटा है। अफसरों ने करीब डेढ़ साल पहले सफारी में गुपचुप तरीके से 4 विशेषज्ञों की नियम विरुद्ध पोस्टिंग कर दी। अपने चहेतों की पोस्टिंग करने के लिए भी बड़ा खेल किया गया। भर्ती का विज्ञाप
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इंस्टाग्राम और फेसबुक में विज्ञापन निकाला गया, ताकि ज्यादा उम्मीदवारों को भर्ती के बारे में पता ही न चले। इतना ही नहीं पोस्टिंग के बाद विशेषज्ञों को वेतन देने के लिए भी नियमों का पालन नहीं किया गया। जंगल सफारी आने वाले पर्यटकों से जाने वाली एंट्री फीस के पैसे से उनका वेतन भुगतान किया गया।
विभाग की उच्च स्तरीय जांच में भर्ती का फर्जीवाड़ा फूट गया है। वन मुख्यालय में जांच रिपोर्ट का परीक्षण किया जा रहा है। आला अफसर खुद हैरान हैं कि सेंट्रल जू अथॉरिटी के नियमों की आड़ में अफसरों से ऐसी गड़बड़ी कैसे कर दी। अफसरों के अनुसार अभी जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है।
भर्ती के समय सफारी में पदस्थ तत्कालीन एमडी धम्मशील गनवीर से जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद ही इस मामले में कार्रवाई तय होगी। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी में करीब डेढ़ साल पहले बायोलॉजिस्ट के दो और नेचर एजुकेशन एक्सपर्ट व पर्यटन समनव्यक के एक-एक पद पर पोस्टिंग की गई।
इसके लिए वन विभाग के मुख्यालय से भी किसी तरह की अनुमति तो दूर सूचना तक नहीं दी गई। बतौर एक्सपर्ट चारों पदों पर पोस्टिंग देने के बाद एक का वेतन 45 हजार, दो का 35,000 और एक का 28 हजार तय किया गया।
ये गड़बड़ी भी कर दी सोशल मीडिया में बायोलॉजिस्ट, नेचर एजुकेशन एक्सपर्ट, पर्यटन समन्वयक और शिक्षा अधिकारी की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था। लेकिन शिक्षा अधिकारी नहीं मिलने पर दो बायोलॉजिस्ट की पोस्टिंग कर दी। इसके लिए हवाला दिया गया कि सेंट्रल जू अथॉरिटी के नियमों के तहत भर्ती की जा रही है। जबकि जांच में खुलासा हुआ कि सेंट्रल जू अथॉरिटी ने बड़ी सफारी के लिए इस तरह के निर्देश दिए हैं। ये सफारी निर्धारित मापदंडों के अनुसार छोटी है। ऐसी दशा में यहां केवल दो पदों पर भर्ती की जरूरत थी।
जांच कमेटी को दिया था ये तर्क जांच कमेटी को साथ बताया था कि सेंट्रल जू अथॉरिटी के नियमों के अनुसार जंगल सफारी के प्रभावी प्रबंधन, वैज्ञानिक अनुरक्षण, वन्य जीवों के कल्याण एवं शैक्षिक तथा जन जागरुकता के लिए विषय विशेषज्ञों को कार्य पर रखा गया था।
रिपोर्ट में बिंदुवार ये खुलासे हुए भर्ती के लिए नियमों का पालन नहीं किया गया। {जंगल सफारी में 4 विशेषज्ञों की नियुक्ति की जरूरत नहीं थी। ये मानक संख्या से ज्यादा है। {2024-25 में बजट से वेतन भुगतान किया। 2025-26 में गेट मनी से भुगतान किया। इसकी अनुमति भी नहीं ली।
जवाब मांगा गया है जांच रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है। उसके आधार पर तत्कालीन डीएफओ और सफारी के एमडी से जवाब मांगा गया है। उनका जवाब आने के बाद ही इस बारे में निर्णय लिया जाएगा। अरुण पांडे, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ
नियमानुसार प्रक्रिया हुई ये सेंट्रल जू अथॉरिटी के नियमों के अनुसार एक्सपर्ट रखे गए। विशेषज्ञों को मानदेय दिया जा रहा था। इसके लिए पीसीसीएफ कार्यालय निर्देश था। धम्मशील गणवीर, तत्कालीन एमडी जंगल सफारी
परीक्षण के बाद निर्णय भर्ती किस आधार पर की गई इस बारे में जांच रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने पर उसका परीक्षण किया जाएगा। गड़बड़ी की गई है तो रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। केदार कश्यप, वन मंत्री
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