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Home » Apart from teachers, sweepers and cooks are also helping. | शिक्षकों के अलावा स्वीपर व रसोइये भी दे रहे हैं साथ – Mahasamund News
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Apart from teachers, sweepers and cooks are also helping. | शिक्षकों के अलावा स्वीपर व रसोइये भी दे रहे हैं साथ – Mahasamund News

By adminJanuary 1, 2026No Comments2 Mins Read
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भास्कर न्यूज| महासमुंद स्कूलों में जहां एक ओर तालाबंदी और हड़ताल का दौर जारी है, वहीं कोकड़ी स्कूल के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया और पूरा स्टाफ नियमित रूप से स्कूल पहुंचकर बच्चों का भविष्य संवारने में जुटा है। हड़ताल में शामिल न होने के अपने निर्णय पर अडि

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उन्होंने कहा कि जो रोटी हम खाते हैं, जिस घर में रहते हैं और जिन सुविधाओं का उपयोग करते हैं, वह सब इन्हीं बच्चों को पढ़ाने के नाम पर मिलता है। ऐसे में वेतन वृद्धि के लिए इन्हीं बच्चों का भविष्य दांव पर लगाना अन्याय है। शाला प्रबंधन विकास समिति ने भी शिक्षक के इस रुख का समर्थन किया है। ग्रामीणों और शिक्षकों का सामूहिक मत है कि मांगें सरकार तक पहुंचानी हैं, तो उसके लिए स्कूल समय के बाद या छुट्टियों के दिनों का उपयोग किया जाना चाहिए।

शीतकालीन छुट्टियों के दौरान हड़ताल न कर पढ़ाई के दिनों में स्कूल बंद करना गरीब बच्चों के अधिकारों का हनन है। विकसित भारत के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका अहम है। जिनका लक्ष्य केवल वेतन बढ़ाना है, वे समाज के लिए खतरा हैं।

शिक्षक कोकडिया ने कहा कि शिक्षक खुद अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे है। गरीब तबके के बच्चें जो सरकारी स्कूलों में पढ़ने आ रहे है हड़ताल कर उनका भविष्य खराब कर रहे है। शिक्षकों को बच्चों की पढ़ाई में बिना व्यवधान के हड़ताल करनी चाहिए। दूसरी ओर परीक्षा एक माह भी नहींे बची है। 2 जनवरी से पहली से आठवी कक्षा तक के बच्चों की अर्धवार्षिक परीक्षा भी है।

शिक्षक कोकडिया ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार को पत्र लिखकर मांग की है। उनके अनुसार, शिक्षा को अनिवार्य सेवा की श्रेणी में शामिल करना चाहिए। संसद में ऐसा कानून बनाया जाए, जिसके जरिए शिक्षकों द्वारा स्कूल बंद कर हड़ताल करने पर रोक लगाई जा सके। शिक्षण को केवल नौकरी नहीं, समाजसेवा और राष्ट्र निर्माण का दायित्व समझा जाए। इसे लेकर उन्होंने मांग उठाई है।



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