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आलापल्ली के जिमेला जंगल में वन्यजीव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश, 6 गिरफ्तार; 2 जिंदा पेंगोलिन और बाघ की 43 हड्डियां जब्त

महाराष्ट्र और तेलंगाना बॉर्डर से लगे आलापल्ली के पास जिमेला जंगल में वन विभाग और पुलिस टीमों ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में वन्यजीवों की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 6 सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

तस्करों से 2 जिंदा पेंगोलिन बरामद किए गए। इनमें एक मादा पेंगोलिन और उसका नवजात बच्चा शामिल है। इसके साथ ही बाघ की 43 हड्डियां और 2 नुकीले दांत भी जब्त किए गए।

यह पूरी कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे ऑपरेशन थंडर-2026 और सेफ पैसेज 3.0 अभियान के तहत की गई। यह अभियान छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओडिशा के जंगलों में तस्करों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए चलाया जा रहा है।

तस्करों की आवाजाही की खबर मिलते ही डब्ल्यूसीसीबी, डीआरआई, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और आलापल्ली वन विभाग की टीमों ने मिलकर पूरे इलाके की घेराबंदी की। आरोपियों को मौका दिए बिना घेरकर दबोच लिया गया। जब्त हड्डियों और दांतों को पुष्टि के लिए फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

तस्करों तक ऐसे पहुंची संयुक्त टीम: एजेंसियों को इनपुट मिला था कि तस्कर जिमेला के पास बाघ के अंगों और जिंदा पेंगोलिन की डील करने पहुंचे हैं। सूचना मिलते ही 4 अलग-अलग विभागों के अफसरों ने संयुक्त टीम बनाकर सीमावर्ती जंगल में दबिश दी। तस्करों के पास से बैग में रखी बाघ की हड्डियां और जिंदा पेंगोलिन बरामद किए गए। उन्हें तुरंत कस्टडी में लिया गया।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में पेंगोलिन के शल्क और बाघ की हड्डियों/दांतों का उपयोग पारंपरिक दवाओं और सजावटी सामान बनाने में होता है। ऐसे में इन जीवों के अंगों की बड़े पैमाने पर मांग होती है।

इन 4 एजेंसियों ने मिलकर चलाया ऑपरेशन: डब्ल्यूसीसीबी (पश्चिमी क्षेत्र) ने तस्करी पैटर्न और तकनीकी विशेषज्ञता उपलब्ध कराई। डीआरआई (एमपी-सीजी) ने तस्करों की अंतरराज्यीय आवाजाही और वित्तीय कड़ियों पर नजर रखी।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व एंटी-पोचिंग यूनिट ने फील्ड इंटेलिजेंस और ग्राउंड नेटवर्क तैयार किया, जबकि आलापल्ली वन प्रभाग ने स्थानीय स्तर पर त्वरित घेराबंदी की और जमीनी कार्रवाई को अंजाम दिया।

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