गड़े धन की चाहत और जादू-टोने का शक: छत्तीसगढ़ में 5 वर्षों में 90 से अधिक मर्डर, तांत्रिकों के जाल में फंस रहे ग्रामीण
छत्तीसगढ़ में जादू-टोना का शक और गड़ा हुआ सोना पाने की चाहत लोगों की जान लेने की बड़ी वजह बनती जा रही है। हैरानी की बात यह है कि इन वारदातों में आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि अक्सर पड़ोसी या करीबी रिश्तेदार ही होते हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और मीडिया रिपोर्ट्स के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 वर्षों में छत्तीसगढ़ में जादू-टोना के शक में 90 से ज्यादा लोगों की हत्या की गई है। अंधविश्वास और लालच के इस खतरनाक गठजोड़ ने प्रदेश के कई परिवारों को तबाह कर दिया है।
हालिया घटनाओं पर नजर डालें तो 12 अक्टूबर 2026 को डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र के चौथना गांव में जादू-टोने के शक में एक ही परिवार के दो सदस्यों की हत्या कर दी गई। इस मामले में आरोप है कि भतीजे हेमंत और सोनू ने अपनी मां के साथ मिलकर अपनी चाची कमला सोनकर और उनके बेटे खुमेन्द्र पर धारदार हथियार से जानलेवा हमला किया, जिससे दोनों की मौत हो गई। इस हमले में चचेरी बहन ममता भी गंभीर रूप से घायल हुई है। पुलिस ने मामले में केशर बाई, हेमंत और सोनू को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के लिए हथियार का लकड़ी का बेंट और कपड़े जलाने की कोशिश भी की थी।
इसी तरह की एक और खौफनाक वारदात 8 अक्टूबर 2026 को रायपुर के आरंग क्षेत्र के बिरबिरा गांव में सामने आई। यहां जादू-टोने के शक में एक बुजुर्ग दंपती की कुल्हाड़ी और हंसिया से वार कर बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोपी पड़ोसी रॉकी साहू (22 वर्ष) को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला कि आरोपी की मां की एक साल पहले मौत हो गई थी और उसे संदेह था कि बुजुर्ग दंपती ने जादू-टोना कर उसकी मां की जान ली है। इसी रंजिश के चलते उसने इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया।
बलौदाबाजार जिले के खरवे गांव में तो अंधविश्वास और लालच ने और भी भयावह रूप ले लिया। यहां 6 फरवरी से 14 मई 2026 के बीच कुल 8 ग्रामीणों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। मृतकों में बद्री पटेल, बुढालू साहू, बुधराम जायसवाल, छत्तूराम साहू, विनोद साहू, गजानंद मांझी, चैतूराम साहू और महेतरू साहू शामिल थे। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ग्रामीण रामसहाय जायसवाल गड़े धन की चाहत और मामूली बातों का बदला लेने के लिए लोगों को निशाना बना रहा था। कसडोल थाना पुलिस ने आरोपी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है।
कोरबा जिले में भी जनवरी 2026 में तंत्र-मंत्र के चक्कर में तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। बरबसपुर स्थित एक स्क्रैप यार्ड में कारोबारी अशरफ मेमन, सुरेश साहू और नीतीश कुमार के शव बरामद हुए थे। जांच में सामने आया कि बिलासपुर का एक कथित तांत्रिक राजेंद्र कुमार 5 लाख रुपये को तंत्र-मंत्र के जरिए ढाई करोड़ रुपये में बदलने का झांसा दे रहा था। इसी लालच में तीनों वहां पहुंचे थे और अपनी जान गंवा बैठे। पुलिस ने इस मामले में कथित तांत्रिक सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
NCRB 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में जादू-टोने से जुड़ी कुल 54 हत्याएं दर्ज की गईं, जिनमें से छत्तीसगढ़ में 10 मामले सामने आए। इस आंकड़े के साथ छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो साल 2021 से 2026 के बीच प्रदेश में ऐसे मामलों में मरने वालों की संख्या 90 से अधिक हो चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लालच, अंधविश्वास और कथित तांत्रिकों का बढ़ता प्रभाव इन हत्याओं का मुख्य कारण है।
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्रा के अनुसार, टोनही के संदेह में महिला प्रताड़ना और मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, 2017 से 2025 तक करीब 1350 मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन यदि अन्य संबंधित मामलों को भी जोड़ दिया जाए तो यह संख्या 3 हजार से अधिक हो जाती है। तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी के मामले भी प्रदेश में लगातार रिपोर्ट किए जा रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की सख्ती और सामाजिक जागरूकता ही इस समस्या का समाधान है। एडवोकेट विपिन अग्रवाल के अनुसार, कथित तांत्रिक और बैगा लोगों को धन वर्षा या बीमारियां ठीक करने का झांसा देकर गुमराह करते हैं। छत्तीसगढ़ में इन गतिविधियों को रोकने के लिए ‘टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005’ लागू है। इसके तहत किसी को टोनही कहना या झाड़-फूंक के नाम पर ठगी करना अपराध है। इसके अलावा हत्या और नरबलि जैसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत उम्रकैद या फांसी की सजा का प्रावधान है।


