पीएम-सेतु योजना: छत्तीसगढ़ के तकनीकी शिक्षा में बड़ा बदलाव, 1446 करोड़ से सुधरेंगे 30 आईटीआई
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के तकनीकी शिक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ‘पीएम-सेतु’ योजना के अंतर्गत प्रदेश के 30 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) का कायाकल्प किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से आईटीआई संस्थानों को आधुनिक सुविधाओं और उन्नत तकनीक से लैस करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस पूरी योजना के क्रियान्वयन के लिए कुल 1,446 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इतनी बड़ी राशि के निवेश से आईटीआई संस्थानों में बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा और वहां पढ़ने वाले छात्रों को वैश्विक स्तर की तकनीकी शिक्षा प्रदान की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस निवेश से राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के बेहतर और अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।
योजना के जमीनी स्तर पर संचालन के लिए औद्योगिक भागीदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में दुर्ग और बस्तर क्लस्टर के लिए विभिन्न उद्योगों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इन समझौतों के माध्यम से उद्योगों की वर्तमान जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण को ढाला जाएगा, ताकि छात्रों को सीधे तौर पर उद्योगों में काम करने का अनुभव मिल सके।
आईटीआई के उन्नयन की इस प्रक्रिया में आधुनिक मशीनरी, नई प्रयोगशालाओं की स्थापना और डिजिटल लर्निंग टूल्स का समावेश किया जाएगा। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ के युवा आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी अग्रसर होंगे। दुर्ग और बस्तर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उद्योगों के साथ समन्वय से स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के द्वार खुलेंगे।
पीएम-सेतु योजना के तहत चयनित इन 30 संस्थानों में छात्रों को भविष्य की तकनीकों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। उद्योगों के साथ हुए एमओयू यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवाओं को नौकरी के लिए भटकना न पड़े। यह पहल राज्य में औद्योगिक विकास और कुशल कार्यबल तैयार करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है।
आने वाले समय में इस योजना के विस्तार और इसके प्रभावों का आकलन किया जाएगा। फिलहाल, 1,446 करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम राशि से होने वाला यह कायाकल्प छत्तीसगढ़ के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने के लिए तैयार है। सरकार का मुख्य फोकस युवाओं के कौशल विकास को उद्योगों की मांग के साथ जोड़ना है और यह योजना उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।




